Chhattisgarh Cabinet Expansion : छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से कैबिनेट विस्तार की हरी झंडी मिल चुकी है। अनुमान है कि 18 अगस्त तक विस्तार की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। शनिवार शाम सीएम साय ने राज्यपाल रामेन डेका से मुलाकात भी की, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं।

14 सदस्यीय मंत्रिमंडल की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व ने 14 सदस्यीय मंत्रिमंडल बनाने पर सहमति जताई है। इसमें संगठन से 2 और RSS की पसंद का 1 चेहरा शामिल किया जा सकता है। फिलहाल मौजूदा मंत्रियों की कुर्सी सुरक्षित रहेगी और उनके विभागों में कोई बदलाव नहीं होगा। मुख्यमंत्री साय ने कैबिनेट विस्तार पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा, “इंतजार करते रहिए, हो भी सकता है।”

सीएम की जापान-कोरिया यात्रा से पहले शपथ की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 21 अगस्त को जापान और दक्षिण कोरिया की आधिकारिक यात्रा पर रवाना होंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह यात्रा से पहले ही संपन्न हो जाएगा।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस
भाजपा संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस बार कैबिनेट विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा। तीन नए मंत्रियों में से एक सामान्य वर्ग, एक अनुसूचित जनजाति (ST) और एक पिछड़ा वर्ग (OBC) से चुना जा सकता है। क्षेत्रीय संतुलन के लिए बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग संभाग से एक-एक मंत्री शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
किनके नाम आगे?
मंत्रिमंडल विस्तार के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल, कुरुद विधायक अजय चंद्राकर, दुर्ग विधायक गजेंद्र यादव, अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल और आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से तीन नेताओं को साय कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
पुराने मंत्रियों पर कोई असर नहीं
राजनीतिक गलियारों में पिछले दिनों लक्ष्मी राजवाड़े, दयालदास बघेल और टंकराम वर्मा को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। लेकिन अब साफ है कि मौजूदा मंत्रियों के विभागों में कोई फेरबदल नहीं होगा और टीम जस की तस रहेगी।
संसदीय सचिवों की नियुक्ति भी संभव
कैबिनेट विस्तार के साथ ही भाजपा सरकार अगस्त महीने में संसदीय सचिवों और निगम-मंडलों के रिक्त पदों पर भी नियुक्ति कर सकती है। इसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ विधायकों का संतुलन साधा जाएगा।
गौरतलब है कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति की परंपरा भाजपा शासनकाल में डॉ. रमन सिंह ने शुरू की थी। उस समय कांग्रेस ने इसे “मिनी कैबिनेट” कहकर असंवैधानिक बताया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद भूपेश बघेल सरकार ने भी इस परंपरा को जारी रखा और 13 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया। अब विष्णुदेव साय सरकार भी इन्हें नियुक्त करने की तैयारी में है।
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