Chhattisgarh DMF Scam : रायपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ जिला खनिज कोष यानी डीएमएफ में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मंगलवार को एक स्थानीय कारोबारी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार कारोबारी की पहचान सतपाल सिंह छाबड़ा के रूप में हुई है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया, जहां अदालत ने पूछताछ के लिए पांच दिनों की ईडी हिरासत मंजूर कर दी।
पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेजे गए सतपाल छाबड़ा
अधिकारियों के मुताबिक, ईडी ने अदालत को जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। एजेंसी का कहना है कि छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से मई में दाखिल किए गए आरोपपत्र में सतपाल सिंह छाबड़ा की भूमिका को अहम बताया गया है। आरोपपत्र के अनुसार, उन्हें कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों, जिला स्तर के अधिकारियों और निजी विक्रेताओं के बीच मुख्य संपर्ककर्ता तथा वित्तीय समन्वयक के रूप में नामित किया गया है।
ईओडब्ल्यू के आरोपपत्र में भूमिका का उल्लेख
ईडी ने अदालत में दावा किया कि छाबड़ा ने कथित तौर पर बीज निगम से जुड़े करीब एक दर्जन विक्रेताओं से 31 करोड़ रुपये से अधिक की रकम कमीशन के तौर पर हासिल की। एजेंसी के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर अवैध तरीके से हासिल की गई धनराशि से जुड़ी थी। ईडी का आरोप है कि इस धन का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।
31 करोड़ रुपये से ज्यादा कमीशन लेने का आरोप
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बीज निगम से जुड़े विक्रेताओं के बीच वित्तीय लेनदेन में छाबड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका थी। ईडी के मुताबिक, कथित कमीशन की रकम काफी बड़ी थी और इसके जरिए हासिल धन को अलग-अलग माध्यमों से इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। एजेंसी अब इस रकम के स्रोत और इसके इस्तेमाल से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
पूछताछ में विरोधाभासी जवाब देने का दावा
ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि छाबड़ा से जांच के दौरान जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन एजेंसी के आरोप के मुताबिक उन्होंने मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। इसके अलावा पीएमएलए के तहत पूछताछ के दौरान उनके बयानों में कथित तौर पर विरोधाभास पाए गए। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर एजेंसी ने उनकी हिरासत की मांग की थी।
DMF फंड में गड़बड़ी का है पूरा मामला
ईडी की जांच का केंद्र छत्तीसगढ़ के जिला खनिज कोष से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताएं हैं। एजेंसी का आरोप है कि बीज निगम और डीएमएफ से संबंधित व्यवस्थाओं के जरिए बड़ी मात्रा में सरकारी धन की कथित हेराफेरी और गबन किया गया। जांच में सरकारी धन के प्रवाह, उससे जुड़े लोगों और कथित लाभार्थियों के बीच वित्तीय संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
क्या है जिला खनिज कोष यानी DMF?
जिला खनिज कोष यानी डीएमएफ एक ट्रस्ट के रूप में काम करता है। इसे खनन गतिविधियों से प्राप्त योगदान के जरिए वित्त पोषित किया जाता है। इसका उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के विकास तथा उनके कल्याण से जुड़ी परियोजनाओं पर धन खर्च करना है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में डीएमएफ के माध्यम से कई विकास और जनकल्याण संबंधी कार्य संचालित किए जाते हैं।
तीन एफआईआर के बाद शुरू हुई ईडी जांच
डीएमएफ मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज की गई तीन एफआईआर का संज्ञान लेने के बाद शुरू की थी। इन एफआईआर में ठेकेदारों पर कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत करके सरकारी धन के गबन का आरोप लगाया गया था।
आगे भी बढ़ सकती है जांच का दायरा
सतपाल सिंह छाबड़ा की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी कथित वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित कमीशन की रकम कहां से आई, किन लोगों तक पहुंची और इसका इस्तेमाल किन संपत्तियों या अन्य माध्यमों में किया गया। पांच दिन की हिरासत के दौरान पूछताछ में मामले से जुड़े और नाम या लेनदेन सामने आने की संभावना है। हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम स्थिति अदालत में सुनवाई तथा आगे की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
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