Chhattisgarh Education : छत्तीसगढ़ में शिक्षा का नया युग, 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगा नया शैक्षणिक सत्र

Chhattisgarh Education : छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा प्रणाली में अगले शैक्षणिक सत्र से एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। अब तक राज्य के सरकारी और सीजी बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों में पढ़ाई का सत्र 16 जून से शुरू होता था, लेकिन अब इसे बदलकर 1 अप्रैल कर दिया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) की तर्ज पर लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना और छात्रों को शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अधिक समय प्रदान करना है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक में इस नीतिगत बदलाव पर मुहर लगाई गई है।

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ड्रॉपआउट बच्चों के लिए 31 जुलाई तक विशेष अभियान

बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले यानी ड्रॉपआउट बच्चों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। विभाग द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में तो सुधार हुआ है, लेकिन हाई स्कूल स्तर पर अभी भी 15.3% बच्चे शिक्षा से दूर हैं। आर्थिक तंगी और अन्य पारिवारिक कारणों से हो रहे इस ड्रॉपआउट को रोकना विभाग के लिए इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसे देखते हुए एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है, जिसके तहत 31 जुलाई तक चिन्हित बच्चों को पुनः स्कूलों की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

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बदलाव की आवश्यकता: क्यों जरूरी था नया शैक्षणिक कैलेंडर?

इस बदलाव के पीछे कई ठोस कारण और लाभ हैं। अब तक सीजी बोर्ड के स्कूलों का सत्र जून में शुरू होता था, जबकि सीबीएसई स्कूल अप्रैल से पढ़ाई शुरू कर देते थे। इस असामान्यता के कारण बोर्ड परीक्षाओं और शैक्षणिक कैलेंडर में बड़ा अंतर था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। साथ ही, जून-जुलाई का समय जो अक्सर प्रवेश प्रक्रिया और किताबों के वितरण में व्यर्थ हो जाता था, उसका उपयोग अब प्रभावी शिक्षण में किया जा सकेगा। अप्रैल से सत्र शुरू होने पर शिक्षकों को पाठ्यक्रम पूरा करने, अतिरिक्त रिवीजन कराने, प्रैक्टिस टेस्ट आयोजित करने और कमजोर छात्रों पर विशेष ध्यान देने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

समय पर किताबों का वितरण और गुणवत्ता में सुधार

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस नई पहल के कार्यान्वयन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम अनिवार्य रूप से 31 मार्च तक घोषित कर दिए जाएं। डॉ. सिंह के अनुसार, पहले किताबों के वितरण का लक्ष्य जून रखा जाता था, जो कई बार जुलाई तक खिंच जाता था। अब 1 अप्रैल से ही स्कूल खुलने और बच्चों को समय पर पुस्तकें मिलने से पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी। ग्रीष्मकालीन अवकाश से पूर्व ही छात्रों को लगभग एक महीने की व्यवस्थित पढ़ाई का लाभ मिलेगा, जिससे वार्षिक प्रदर्शन में व्यापक सुधार की उम्मीद है।

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