Durg Crime : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रशासन और पुलिस की सक्रियता से एक बड़े अवैध कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के कचांदूर गांव में स्थित एक गोदाम में निरमा पाउडर की पैकिंग के नाम पर जर्दा युक्त गुटखा बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। मंगलवार रात पुलिस ने इस ठिकाने पर छापेमारी की, जहां से भारी मात्रा में गुटखा बनाने वाला कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की गईं। अवैध गतिविधियों के सामने आने के बाद पुलिस ने पूरी फैक्ट्री को सील कर दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

किरायानामा बनाकर दिया गया था पुलिस को धोखा
आरोपी मोहम्मद सानू, जिसने खुद को उत्तर प्रदेश का निवासी बताया था, ने लगभग 15 से 20 दिन पहले कचांदूर गांव में मोहम्मद मुस्तफा का गोदाम किराए पर लिया था। आरोपी ने गोदाम मालिक को भरोसा दिलाया था कि यहां केवल निरमा पाउडर की पैकिंग का काम होगा। दोनों के बीच बाकायदा कानूनी किरायानामा भी तैयार किया गया था, ताकि किसी को शक न हो। हालांकि, कुछ दिनों बाद आरोपी ने अपना मोबाइल बंद कर लिया, जिससे मालिक को संदेह हुआ। जब आसपास के लोगों ने गोदाम के भीतर संदिग्ध गतिविधियां देखीं, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई।

पुलिस की छापेमारी में बरामद हुआ कच्चा माल और मशीनें
गोदाम मालिक की शिकायत पर जेवरा सिरसा पुलिस ने मंगलवार रात मौके पर पहुंचकर गोदाम का ताला खोला। अंदर का नजारा देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। वहां मिक्सर मशीन, कटर मशीन और अन्य आधुनिक उपकरण मौजूद थे, जिनका उपयोग जर्दा युक्त गुटखा बनाने में किया जा रहा था। बड़ी तादाद में बोरियों में भरा कच्चा माल और तैयार पैकिंग सामग्री पुलिस ने जब्त कर ली है। सूचना मिलते ही फूड सेफ्टी विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और पूरे परिसर की जांच की। इस अवैध धंधे के तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं, इसकी जानकारी जुटाने के लिए प्रशासन अब जब्त सामग्री की बारीकी से जांच कर रहा है।
क्षेत्र में सक्रिय है अवैध गुटखा माफियाओं का नेटवर्क
भिलाई नगर सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी मोहम्मद सानू फिलहाल फरार है और उसकी तलाश में टीमें जुट गई हैं। गौरतलब है कि दुर्ग जिले में अवैध गुटखा फैक्ट्रियों के खिलाफ यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले 11 जून को अंडा थाना पुलिस ने कुथरेल गांव में इसी तरह के एक और रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जिसमें 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहां भी निरमा वाशिंग पाउडर की पैकिंग की आड़ में यही अवैध काम चल रहा था। महज 12 दिनों के भीतर जिले में दूसरी बड़ी फैक्ट्री का खुलासा होना इस बात का प्रमाण है कि इलाके में अवैध कारोबारियों का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है। पुलिस अब इन घटनाओं के पीछे के बड़े सिंडिकेट की तलाश कर रही है ताकि इस अवैध व्यापार पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।











