CJP School Campaign : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों की स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। पत्र में स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों के रिक्त पद, सरकारी फंडिंग और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब मांगा गया है। दीपके ने कहा कि देश के कई सरकारी स्कूल आज भी आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने पर चिंता
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आजादी के दशकों बाद भी कई इलाकों में बच्चों को पीने का साफ पानी, उपयोगी शौचालय, बेहतर कक्षाएं, पर्याप्त बेंच और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि किसी भी बच्चे को ऐसी परिस्थितियों में शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की अपील
CJP संयोजक ने केंद्र और राज्य सरकारों से सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने सरकारी स्कूलों की मौजूदा कमियों को दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की। दीपके ने कहा कि स्कूलों की स्थिति सुधारना किसी एक राजनीतिक दल या सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के बच्चों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय है।
शिक्षा मंत्रालयों से जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
दीपके ने उम्मीद जताई कि सभी राज्यों के संबंधित शिक्षा मंत्रालय उनके सवालों का जवाब देंगे और जरूरी आंकड़ों को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूलों में खराब बुनियादी ढांचे के कारण किसी भी बच्चे को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न होना पड़े।
स्कूलों के नवीनीकरण को लेकर पहला सवाल
CJP की ओर से राज्यों से छह प्रमुख सवाल पूछे गए हैं। पहले सवाल में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकारी स्कूलों में किए गए नवीनीकरण की जानकारी मांगी गई है। इसके साथ यह भी पूछा गया है कि वर्तमान में कितने स्कूलों को मरम्मत की आवश्यकता है और कितने स्कूलों का पूर्ण नवीनीकरण जरूरी है।
शिक्षकों के खाली पदों और नियुक्तियों का हिसाब
दूसरे सवाल में राज्यों से सरकारी स्कूलों में स्वीकृत शिक्षण पदों की संख्या बताने को कहा गया है। साथ ही कितने पद वर्तमान में भरे हुए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं, इसका विवरण भी मांगा गया है। CJP का मानना है कि शिक्षकों की उपलब्धता सीधे तौर पर शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
शिक्षा बजट और खर्च का पूरा विवरण मांगा
तीसरे सवाल में पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए आवंटित बजट और वास्तविक खर्च का विवरण मांगा गया है। दीपके ने राज्यों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि शिक्षा के लिए निर्धारित धनराशि में से कितनी राशि वास्तव में स्कूलों की जरूरतों पर खर्च हुई।
नए सरकारी स्कूलों की जरूरत पर जानकारी
चौथे सवाल में पूछा गया है कि प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए राज्य में वर्तमान स्कूलों के अलावा कितने नए सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है। इसके जरिए स्कूलों की संख्या और विद्यार्थियों की जरूरत के बीच मौजूद संभावित अंतर का आकलन करने की कोशिश की गई है।
शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक काम लेने पर सवाल
पांचवें सवाल में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से कराए जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों की जानकारी मांगी गई है। CJP ने पूछा है कि पढ़ाने के अलावा शिक्षकों को कौन-कौन सी प्रशासनिक या अन्य जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं और इन कार्यों का उनके शिक्षण पर क्या प्रभाव पड़ता है।
डिजिटल सुविधाओं और खेल संसाधनों की स्थिति पूछी
छठे सवाल में कंप्यूटर और डिजिटल लर्निंग सुविधाओं के साथ-साथ उपयोग योग्य शौचालय और खेल-कूद की सुविधाओं की जानकारी मांगी गई है। CJP जानना चाहती है कि कितने सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए ये जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं और उनका वास्तविक उपयोग हो रहा है या नहीं।
स्कूल दौरों के बीच सामने आया पत्र
यह पत्र CJP नेताओं की ओर से सरकारी स्कूलों में किए जा रहे दौरों के बीच सामने आया है। पार्टी नेताओं ने कई स्कूलों का निरीक्षण कर कथित तौर पर खराब शौचालय, बेंच और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है।
अभिजीत दीपके के खिलाफ FIR दर्ज
इस बीच, महाराष्ट्र के लातूर जिले के औसा में जिला परिषद स्कूल में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में अभिजीत दीपके के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, दीपके बिना अनुमति स्कूल परिसर में पहुंचे और सरकारी कामकाज में कथित तौर पर बाधा डाली। इस घटनाक्रम के बीच CJP द्वारा शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को और तेज कर दिया है।
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