Karachi Attack : कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के कैंप पर हुए हालिया आतंकी हमले के बाद पड़ोसी मुल्क के सैन्य नेतृत्व ने एक बार फिर अपनी पुरानी आदत दोहराते हुए भारत पर निराधार आरोप मढ़ दिए हैं। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि इस कायराना हमले के पीछे भारत का हाथ है और इसे भारत समर्थित प्रॉक्सी संगठन ‘जमात-उल-अहरार’ द्वारा अंजाम दिया गया है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता (डीजी आईएसपीआर) के अनुसार, 27 जून 2026 को हुए इस हमले में तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया और एक घायल हमलावर को गिरफ्तार किया गया है, जिसकी पहचान अफगान नागरिक के रूप में हुई है। इस मुठभेड़ में पाकिस्तान के तीन जवानों ने अपनी जान गंवाई और चार अन्य घायल हुए। पाकिस्तानी सेना ने इस घटना के बहाने ‘अज़्म-ए-इस्तेहकाम’ विज़न के तहत आतंकवाद-विरोधी अभियान को और तेज करने की बात कही है।

मनीष तिवारी का पलटवार: ‘घर के आंगन में पाले हैं सांप’
पाकिस्तान के इन बेतुके आरोपों पर भारत की ओर से कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पाकिस्तान को आईना दिखाया है। तिवारी ने अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के 2011 के उस प्रसिद्ध बयान को याद दिलाया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से कहा था कि, “आप अपने घर के आंगन में सांप पालकर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वे सिर्फ आपके पड़ोसियों को ही काटेंगे। आखिरकार, वे सांप उसी इंसान को डसेंगे जिसने उन्हें अपने घर में पाला है।” मनीष तिवारी ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने गिरेबान में झांके और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद को पनाह देने और निर्यात करने का सिलसिला बंद करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की ‘डीप स्टेट’ नीति ही उनकी सबसे बड़ी समस्या है।

सैन्य नेतृत्व की प्रतिक्रिया और शहादत पर राजनीति
पाकिस्तानी सेना के बयान में थल सेना प्रमुख (COAS) आसिम मुनीर का विशेष उल्लेख किया गया है, जिन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पाकिस्तान ने इन हमलों का बदला लेने और भारत-समर्थित संगठनों को खत्म करने का दावा किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को छिपाने के लिए अक्सर भारत का नाम लेता रहा है। कराची में हमले की जिम्मेदारी लेने वाले संगठनों का इतिहास और सीमा पार से संचालित आतंकवाद इस बात का सबूत है कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद की उस आग में जल रहा है, जिसे उसने वर्षों तक रणनीतिक लाभ के लिए खाद-पानी दिया था।
आतंकवाद के प्रति भारत का कड़ा रुख और वैश्विक राय
आतंकवाद को लेकर भारत की नीति हमेशा से स्पष्ट रही है: “आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” पाकिस्तान का ताजा आरोप अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अपनी विश्वसनीयता खो चुके उस देश की हताशा को दर्शाता है। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी तरफ दुनिया जानती है कि किस तरह वहां के ‘डीप स्टेट’ ने गैर-राज्य अभिनेताओं (non-state actors) को अपनी नीतियों का हथियार बनाया। मनीष तिवारी का बयान इस बात का संकेत है कि भारत अब इन पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का जवाब देने के लिए और अधिक आक्रामक कूटनीति अपना रहा है। पाकिस्तान की यह कोशिश कि कराची हमले का ठीकरा भारत पर फोड़कर वह अंतरराष्ट्रीय दबाव से बच जाएगा, अब बेकार साबित हो रही है।
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