USD to INR : हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा बाजार में उत्साहजनक संकेत देखने को मिले हैं। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान भारतीय रुपये में मजबूती दर्ज की गई और यह 20 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.25 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। इस मजबूती के पीछे मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और विदेशी निवेश प्रवाह में हो रहे सुधार को माना जा रहा है। हालांकि, बाजार की धारणा पर मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबाव अभी भी बना हुआ है, जो पिछले 13 महीनों के अपने उच्चतम स्तर के करीब है। विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान संकट जैसे भू-राजनीतिक मुद्दों का समाधान होता है, तो विदेशी निवेशकों की वापसी से रुपये में और भी अधिक तेजी देखने को मिल सकती है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रही मजबूती
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार की बात करें तो रुपये ने 94.36 प्रति डॉलर के स्तर पर दिन की शुरुआत की थी। सत्र के दौरान इसमें और सुधार हुआ और यह 94.25 के स्तर तक पहुंच गया, जो कि पिछले कारोबारी सत्र (गुरुवार) के बंद भाव 94.45 की तुलना में 20 पैसे की उल्लेखनीय बढ़त को दर्शाता है। गौरतलब है कि मुहर्रम के अवकाश के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर, मुद्रा और जिंस बाजार पूरी तरह बंद थे, जिसके बाद सोमवार को कामकाज की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 101.37 पर बना हुआ है, जो रुपये के लिए एक निरंतर चुनौती बनी हुई है।

शेयर बाजार की चाल और विदेशी निवेशकों का रुख
सोमवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 63.65 अंक की गिरावट के साथ 77,047.63 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी में मामूली तेजी रही और यह 16.55 अंक चढ़कर 24,070.20 के स्तर पर रहा। बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) घरेलू बाजार में अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं। गुरुवार के आंकड़ों के अनुसार, FIIs शुद्ध लिवाल रहे और उन्होंने भारतीय बाजार में 383.76 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की थी। यह सकारात्मक प्रवाह भारतीय मुद्रा के लिए एक सहारा बना हुआ है।
कच्चे तेल की स्थिति और आगे की संभावनाएं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव डालते हैं। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड का भाव 0.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72.51 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। हालांकि कच्चे तेल में यह हल्की तेजी चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन यह अभी भी उस स्तर पर है जो भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल माना जा सकता है। जानकारों का कहना है कि रुपये का समग्र रुझान सकारात्मक बना हुआ है, बशर्ते वैश्विक अनिश्चितताएं कम हों। आने वाले दिनों में विदेशी निवेश और डॉलर की चाल यह तय करेगी कि रुपया अपनी इस बढ़त को कितना बरकरार रख पाता है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक स्तर पर होने वाले घटनाक्रमों और आरबीआई के हस्तक्षेप पर टिकी है।










