Congress Rift:
Congress Rift: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक कार्यक्षमता की तारीफ किए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक संतुलित लेकिन महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। थरूर ने स्पष्ट किया कि वे भी चाहते हैं कि कांग्रेस का संगठन और अधिक मजबूत बने और उसमें अनुशासन का स्तर ऊंचा हो। थरूर के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल की सफलता के लिए उसका अनुशासित होना अनिवार्य है, और यदि किसी प्रतिद्वंद्वी संगठन में कोई अच्छी कार्यशैली है, तो उसे सीखने में कोई बुराई नहीं है।
जब शशि थरूर से सीधे तौर पर यह सवाल पूछा गया कि क्या कांग्रेस को RSS से अनुशासन सीखना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “हमें निश्चित रूप से अनुशासन और संगठन की मजबूती सीखनी चाहिए।” हालांकि, उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी का अपना 140 वर्षों का एक समृद्ध और गौरवशाली इतिहास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस अपने स्वयं के अनुभवों और इतिहास से भी बहुत कुछ सीख सकती है। थरूर का मानना है कि दिग्विजय सिंह ने जो कहा वह उनकी अपनी व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन एक पार्टी के रूप में कांग्रेस को अपनी जड़ों को मजबूत करते हुए कैडर के भीतर अनुशासन लाने की तत्काल आवश्यकता है।
इस पूरे विवाद की जड़ दिग्विजय सिंह का वह सोशल मीडिया पोस्ट है, जो उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक से ठीक पहले साझा किया था। सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दशकों पुरानी एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें मोदी जमीन पर लालकृष्ण आडवाणी के चरणों के पास बैठे नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर के साथ दिग्विजय ने टिप्पणी की थी कि कैसे एक साधारण जमीनी स्वयंसेवक अपनी संगठन शक्ति के बल पर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच गया। इस पोस्ट को कई लोगों ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व को आईना दिखाने की कोशिश के रूप में देखा।
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह पिछले कुछ समय से लगातार पार्टी के आंतरिक ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में राहुल गांधी को संबोधित करते हुए एक पोस्ट में कहा था कि कांग्रेस को ‘व्यावहारिक विकेंद्रीकरण’ की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी थी कि संगठन पर ध्यान देने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी चुटकी ली थी कि राहुल गांधी को किसी बात के लिए मनाना आसान काम नहीं है। उनके इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस की वर्तमान कार्यशैली में बड़े बदलाव के पक्षधर हैं।
जब उनके बयान पर पार्टी के भीतर ही विरोध के स्वर उठने लगे और सुप्रिया श्रीनेत जैसे नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, तो दिग्विजय सिंह ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का अर्थ विचारधारा से समझौता करना नहीं था। सिंह ने कड़े शब्दों में कहा, “गांधी के हत्यारों से हमें कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल एक संगठन के तौर पर ‘मैकेनिज्म’ की बात कर रहे थे, न कि उनकी विचारधारा की। उन्होंने दोहराया कि वे संसद से लेकर सड़क तक सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ते रहे हैं और उनके कांग्रेस प्रेम पर कोई संदेह नहीं किया जाना चाहिए।
दिग्विजय सिंह और शशि थरूर के ये बयान दर्शाते हैं कि कांग्रेस के भीतर एक ऐसा वर्ग है जो मानता है कि वैचारिक विरोध के बावजूद प्रतिद्वंद्वी की सांगठनिक मजबूती से सबक लेना चाहिए। हालांकि, पार्टी का एक बड़ा हिस्सा किसी भी तरह की तुलना को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। यह बहस आने वाले दिनों में कांग्रेस के सांगठनिक चुनावों और रणनीतियों पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।
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