Damascus Blast : सीरिया की राजधानी दमिश्क में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शारा के साथ अहम द्विपक्षीय वार्ता के लिए दौरे पर होने के दौरान शहर के बीचों-बीच दो शक्तिशाली बम धमाके हुए। यह घटनाक्रम तब घटित हुआ जब मैक्रों सीरियाई राष्ट्रपति से मुलाकात करने के लिए राष्ट्रपति भवन में प्रवेश कर रहे थे। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरे शहर में दहशत का माहौल बन गया। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों का ठहरने का स्थान ‘फोर सीजन्स होटल’ था, जिसके ठीक पास ये धमाके हुए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सीरियाई अधिकारियों ने फिलहाल इस संवेदनशील घटना पर आधिकारिक टिप्पणी करने से परहेज किया है।

विस्फोटक उपकरणों का उपयोग: राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था चरमराई
सरकारी मीडिया ने एक अज्ञात सुरक्षा अधिकारी के हवाले से पुष्टि की है कि राजधानी के हृदय स्थल पर हुए ये दो धमाके पूर्व-नियोजित विस्फोटक उपकरणों (Explosive Devices) का उपयोग करके किए गए थे। धमाके के तुरंत बाद घटनास्थल से धुएं का घना गुबार आसमान में उठता देखा गया, जो हमले की भयावहता को दर्शा रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फुटेज और तस्वीरों में सड़क पर एक वाहन को जलते हुए देखा जा सकता है, जबकि जमीन पर फैले खून के धब्बे हृदयविदारक स्थिति बयां कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक हताहतों की संख्या के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है, और न ही किसी आतंकवादी समूह या गुट ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली है।

बढ़ती असुरक्षा और बार-बार हो रहे आतंकी हमले
यह आतंकी वारदात दमिश्क के संवेदनशील ‘जस्टिस पैलेस’ के निकट एक कैफे में हुए पिछले बम धमाके के कुछ ही दिनों के भीतर हुई है। गौरतलब है कि उस पिछली घटना में कम से कम 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दमिश्क के मुख्य इलाकों में इस तरह के बार-बार हो रहे हमले सीरिया की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी प्रयासों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। राष्ट्रपति मैक्रों जैसे अंतरराष्ट्रीय नेता की मौजूदगी के दौरान सुरक्षा घेरे में यह सेंध सीरियाई सुरक्षा एजेंसियों की कार्यक्षमता और खुफिया तंत्र की विफलता को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर पड़ सकता है इस घटना का प्रभाव
मैक्रों और अल-शारा के बीच होने वाली यह बैठक सीरियाई संकट और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। धमाकों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों और सुरक्षा सहयोग को लेकर होने वाली चर्चाओं पर इसका सीधा असर पड़ना तय है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि दमिश्क में अस्थिरता पैदा करने के उद्देश्य से इन हमलों को अंजाम दिया गया है, ताकि शांति प्रयासों को बाधित किया जा सके। फिलहाल, पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है और जांच की जा रही है कि आखिर इतने कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद हमलावर अपने मंसूबों में कामयाब कैसे हुए। सीरिया के नागरिक अब डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
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