Ram Mandir Row : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में हुई चोरी के मामले में एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट ने मंदिर प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा और उसके प्रबंधन को लेकर जो व्यवस्था लागू थी, वह बेहद लचर और संदिग्ध थी। एसआईटी के अनुसार, यह केवल छोटी-मोटी मानवीय भूल नहीं, बल्कि ‘क्रिमिनल लापरवाही’ थी, जिसने शातिर चोरों को मंदिर के खजाने पर हाथ साफ करने का खुला निमंत्रण दिया। श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक सोना, चांदी और अरबों रुपये की नकदी के प्रबंधन में बरती गई यह ढिलाई न केवल चौंकाने वाली है, बल्कि यह करोड़ों भक्तों की भावनाओं के साथ एक बड़ा खिलवाड़ भी है।

रिकॉर्ड-कीपिंग में भारी अनियमितताएं और वित्तीय पारदर्शिता का अभाव
एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर में रखी गई हुंडियों (दानपात्रों) को खोलने और उनमें निकले चढ़ावे का रिकॉर्ड रखने में भारी अनियमितताएं पाई गईं। दानपात्रों से निकली नकदी और सामग्री को बिना किसी व्यवस्थित रिकॉर्ड के आपस में मिला दिया जाता था, जिससे यह ट्रैक करना असंभव हो गया कि किस दानपात्र से कितनी राशि प्राप्त हुई। दान की गणना की दैनिक प्रक्रिया, उसका ब्यौरा और शेष राशि के प्रबंधन का कोई लिखित दस्तावेज मौजूद नहीं था। कीमती रत्नों, सोने और चांदी के आभूषणों के रखरखाव में भी नियमों का उल्लंघन किया गया। अनिवार्य फोटोग्राफी, सटीक वजन का मापन और सीलिंग जैसी प्रक्रियाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण कागजी दस्तावेजों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर देखने को मिला।

सुरक्षा नियमों की धज्जियां: तलाशी और बायोमेट्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन
बैंक और ट्रस्ट के बीच बनी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के बावजूद सुरक्षा के बुनियादी मानकों का पालन नहीं हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिनती कक्ष में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों के लिए तय ड्रेस कोड, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और निजी सामान पर पाबंदी जैसे सुरक्षा चक्र केवल फाइलों तक ही सीमित रहे। मंदिर में लगे हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों की उपस्थिति के बावजूद, निगरानी और सुपरविजन का पूरा सिस्टम ध्वस्त था। एसआईटी ने पाया कि चोरियां लगातार होती रहीं और किसी ने भी प्रभावी ढंग से निगरानी नहीं की, जिससे स्पष्ट होता है कि जवाबदेही का पूरा ढांचा ही नदारद था।

जवाबदेही का अभाव और अनधिकृत पहुंच से मिली मदद
जांच में सबसे गंभीर वित्तीय चूक यह सामने आई कि कुछ लोग बिना किसी आधिकारिक लिखित आदेश के मंदिर के खजाने और दानपात्रों की व्यवस्था को संभाल रहे थे। इस अनधिकृत पहुंच ने चोरों के लिए खजाने के द्वार खोल दिए। पूरे सिस्टम में न तो किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय थी और न ही कोई जवाबदेही का प्रावधान था। रिपोर्ट का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि मिलीभगत और जानबूझकर बरती गई लापरवाही का परिणाम है।
भविष्य के लिए सख्त सुधारों की सिफारिश
एसआईटी की यह रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है कि मंदिर की सुरक्षा और दान प्रबंधन प्रणाली में व्याप्त खामियों का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने लंबे समय तक गबन की घटनाओं को अंजाम दिया। अब जांच दल ने पूरे सिस्टम को तत्काल प्रभाव से पारदर्शी, अभेद्य और सख्त बनाने की सिफारिश की है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा के साथ समझौता करना कितना महंगा पड़ सकता है। प्रशासन अब इस रिपोर्ट के आधार पर व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की कवायद में जुटा है, ताकि भक्तों के दान की एक-एक पाई सुरक्षित रहे।
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