Delhi Police FIR : दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित रूप से भ्रामक और डॉक्टर्ड वीडियो प्रसारित करने के मामले में एक सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह वीडियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर से संबंधित बताया जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि संबंधित हैंडल ने वकील प्रशांत भूषण के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किए गए वीडियो को आगे प्रसारित किया। पुलिस के मुताबिक, वीडियो में कथित तौर पर विदेश मंत्री के बयान को इस तरह प्रस्तुत किया गया, जिससे भारत विरोधी संदेश जाने और लोगों के बीच भ्रम फैलने की आशंका थी।
3 नवंबर को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान मिली जानकारी
पुलिस के अनुसार, 3 नवंबर 2026 को नियमित साइबर पेट्रोलिंग के दौरान इस सोशल मीडिया पोस्ट पर अधिकारियों की नजर पड़ी। जांच में सामने आया कि एक सोशल मीडिया हैंडल ने प्रशांत भूषण के अकाउंट से साझा किए गए विदेश मंत्री एस. जयशंकर के कथित डॉक्टर्ड वीडियो को दोबारा शेयर किया था।

पुलिस का कहना है कि इस वीडियो के माध्यम से भ्रामक, मानहानिकारक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित की गई। आरोप है कि इस तरह की पोस्ट से सार्वजनिक उपद्रव और अफवाहें फैल सकती थीं। इसी आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की।

प्रशांत भूषण के हैंडल से साझा वीडियो पर क्यों उठा विवाद?
इस पूरे मामले में प्रशांत भूषण के सोशल मीडिया हैंडल से साझा किए गए वीडियो का भी जिक्र किया गया है। पुलिस के मुताबिक, संबंधित अकाउंट ने उसी वीडियो को आगे प्रसारित किया था। वीडियो को कथित तौर पर डॉक्टर्ड बताया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में किस तरह बदलाव किए गए और मूल बयान से उसका कितना अंतर है, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
पुलिस ने इस मामले में सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की प्रकृति और उसके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की है। फिलहाल एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति या सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

स्पेशल सेल थाने में दर्ज हुई एफआईआर
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में स्पेशल सेल थाने में एफआईआर नंबर 263/26 दर्ज की है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4), 353(1)(सी), 356 और 340(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66C लगाई गई है।
इन धाराओं के तहत पुलिस मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो किस स्रोत से आया, उसमें कथित रूप से क्या बदलाव किए गए और उसे आगे प्रसारित करने में संबंधित सोशल मीडिया हैंडल की क्या भूमिका रही।
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स को दी चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी साझा की है। पुलिस ने कहा है कि भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो, तस्वीर या बयान को बिना सत्यापन के साझा न करें। खासतौर पर संवेदनशील राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़ी सामग्री को आगे भेजने से पहले उसकी प्रमाणिकता जांचना जरूरी है।
जांच के बाद सामने आएगी वीडियो की पूरी सच्चाई
फिलहाल दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान वीडियो के मूल स्रोत, उसकी प्रामाणिकता और उसे साझा करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित डॉक्टर्ड वीडियो किस तरह तैयार हुआ और इसे प्रसारित करने के पीछे क्या उद्देश्य था।

