Diwali 2026 : हिंदू धर्म में दिवाली को रोशनी और खुशियों का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपक, मोमबत्तियों, रंगोली और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक है। दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाए जाते हैं। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी।
दिवाली की रात कितने दीपक जलाने चाहिए?
दिवाली पर दीपक जलाने की कोई एक निश्चित संख्या सभी परिवारों के लिए अनिवार्य नहीं मानी जाती। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अपनी परंपराओं के अनुसार दीपक जलाने का विधान है। कई घरों में 5, 11, 21 या 51 दीपक जलाए जाते हैं। कुछ लोग अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार इससे अधिक दीपक भी सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में दीपों की संख्या से ज्यादा श्रद्धा, स्वच्छता और पूजा के भाव को महत्व दिया जाता है।

मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाना माना जाता है शुभ
दिवाली की रात घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीपक जलाने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी का आगमन मुख्य द्वार से होता है। इसलिए दिवाली के दिन प्रवेश द्वार को साफ करके वहां दीपक रखे जाते हैं। कई परिवार दरवाजे के दोनों ओर दीपक जलाते हैं। इसके अलावा रंगोली बनाकर उसके आसपास भी दीप सजाए जाते हैं। इससे घर का प्रवेश द्वार आकर्षक और रोशनी से जगमगाता नजर आता है।

पूजा घर में घी का दीपक जलाने की परंपरा
दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के दौरान घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में घी के दीपक को सात्विकता और शुभता का प्रतीक माना गया है। पूजा स्थल पर देवी-देवताओं के सामने सुरक्षित स्थान पर दीपक रखा जाता है। ध्यान रखें कि दीपक में पर्याप्त घी हो और उसकी लौ हवा से सुरक्षित रहे। इसे कपड़ों, पर्दों या पूजा सामग्री के बहुत पास नहीं रखना चाहिए।
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने का महत्व
हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय स्थान प्राप्त है। इसलिए दिवाली की शाम तुलसी के पास भी दीपक जलाने की परंपरा कई परिवारों में निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी के समीप दीपक जलाने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। हालांकि, दीपक को पौधे की पत्तियों के बिल्कुल पास नहीं रखना चाहिए, ताकि गर्मी से उन्हें नुकसान न पहुंचे।

खिड़कियों, बालकनी और आंगन में भी करें रोशनी
दिवाली पर घर के हर हिस्से को रोशन करने की परंपरा है। इसलिए लोग खिड़कियों, बालकनी और आंगन में भी दीपक सजाते हैं। कई परिवार आंगन में दीपों की कतार बनाकर घर को आकर्षक रूप देते हैं। यदि घर में खुली छत है, तो वहां भी सुरक्षित स्थान पर दीपक रखे जा सकते हैं।
रसोई में दीपक जलाते समय बरतें सावधानी
रसोई को अन्न और भोजन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसी वजह से कई परिवार दिवाली की रात यहां भी दीपक जलाते हैं। इसे अन्न के सम्मान और घर में बरकत की कामना से जोड़ा जाता है। हालांकि, रसोई में दीपक को गैस चूल्हे, सिलेंडर, तेल, घी और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना जरूरी है।
दीपक जलाते समय सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान
दिवाली पर दीपक सजाते समय बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से उन्हें दूर रखें। दीपक हमेशा स्थिर और अग्निरोधक सतह पर रखें। उन्हें पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील चीजों के पास न रखें। इस तरह श्रद्धा और सावधानी के साथ दीपावली का त्योहार रोशनी और खुशियों से मनाया जा सकता है।
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