Donald Trump on Iran
Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवरों से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। नेशनल रिपब्लिकन कांग्रेशनल कमेटी (NRCC) के वार्षिक फंडरेजिंग डिनर के दौरान ट्रंप ने ईरान को लेकर कई चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सख्त नीतियों और सैन्य दबदबे के कारण आज ईरान के भीतर भारी खौफ का माहौल है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका का डर इस कदर बैठ गया है कि अब ईरान में कोई भी नेता ‘सुप्रीम लीडर’ का पद संभालने के लिए उत्सुक नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने दुनिया भर में अपनी खोई हुई साख और सम्मान को वापस पाया है।
अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की सफलताओं का बखान करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक 8 संभावित युद्धों को रुकवाने में कामयाबी हासिल की है। ईरान के संदर्भ में उन्होंने कहा, “मध्य पूर्व में हम ईरान के साथ जो कर रहे हैं, वैसा इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया। हम एक और युद्ध जीत रहे हैं।” ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व वर्तमान में बातचीत तो करना चाहता है, लेकिन वे अपने ही लोगों और अमेरिका के डर से इसे सार्वजनिक करने से कतरा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ईरान का सर्वोच्च नेता बनने के लिए अब उतना उत्साह नहीं बचा है, जितना किसी अन्य देश का प्रमुख बनने के लिए देखा जाता है।
ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका के बाहर निकलने के अपने फैसले को पूरी तरह सही ठहराया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर निशाना साधते हुए कहा कि ओबामा प्रशासन ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने का “पूरा अधिकार” दे दिया था। ट्रंप ने याद दिलाया कि जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते के खिलाफ गुहार लगाई थी, तब भी ओबामा ने उसे अनसुना कर दिया था। ट्रंप ने दावा किया, “अगर मैंने पद संभालते ही इस समझौते को खत्म नहीं किया होता, तो आज ईरान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश होता और दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन चुका होता।”
ईरानी जनरल कासेम सुलेमानी की हत्या का जिक्र करते हुए ट्रंप ने इसे अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। सुलेमानी, जो ईरान की कुद्स फोर्स के शक्तिशाली कमांडर थे, उन्हें ट्रंप ने “शैतानी इंसान” करार दिया। हालांकि, उन्होंने सुलेमानी को एक सख्त जनरल और असली लीडर भी माना, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि वैश्विक सुरक्षा के लिए उन्हें खत्म करना अनिवार्य था। गौरतलब है कि 3 जनवरी 2020 को बगदाद में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी की मौत हुई थी, जिसका आदेश स्वयं राष्ट्रपति ट्रंप ने दिया था। ट्रंप का मानना है कि इस कदम के बाद से अमेरिका की इज्जत दुनिया की नजरों में पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।
ट्रंप ने अपने भाषण के समापन में यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति ने मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और परमाणु हथियारों की दौड़ में ईरान को रोकने के लिए वह हर संभव कदम उठाएगा। ट्रंप के इन बयानों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव और अधिक गहरा सकता है, जिसका सीधा असर वैश्विक राजनीति और तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।
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