Gyanesh Kumar Controversy : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि जब ज्ञानेश कुमार एक कार्यरत IAS अधिकारी थे, तब उनका इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी के लिए राजनीतिक भर्ती में किया गया और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका दी। राहुल ने अपने पोस्ट में चुनावी प्रक्रिया को लेकर “मैच-फिक्सिंग” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। हालांकि, ये राहुल गांधी द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
केरल के पूर्व मुख्य सचिव के बयान का दिया हवाला
राहुल गांधी ने जिस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, उसमें केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन के हवाले से ज्ञानेश कुमार को लेकर एक दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, थॉमसन ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क किया था और उन्हें बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था। दावा यह भी है कि उन्हें मंत्री पद की पेशकश की गई थी। राहुल गांधी ने इसी दावे को आधार बनाकर चुनाव आयोग की मौजूदा भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इस दावे को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया अलग से देखी जानी बाकी है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों को बताया बेबुनियाद
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक अखबार की मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस और राहुल गांधी चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने इन आरोपों को बेबुनियाद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पूरे मामले पर अपना आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया है। बीजेपी सांसद के मुताबिक, आयोग की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त समेत तीनों चुनाव आयुक्त मौजूद थे और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक से बढ़ी चर्चा
शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में पूर्ण आयोग की बैठक की। यह बैठक ऐसे समय हुई जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। बैठक के बाद आयोग ने कई मुद्दों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। इनमें SIR प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण, Form 6, ECINET और दावों-आपत्तियों से जुड़े विषय शामिल रहे।
SIR के फैसलों पर चुनाव आयोग ने दी सफाई
चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक पक्ष में कहा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले पूर्ण आयोग की मंजूरी और तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी कहा कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने कथित आंतरिक मतभेदों की रिपोर्टों के जवाब में कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
रिपोर्टों में दर्ज आपत्तियों को लेकर विवाद
इस विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट भी है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में SIR, Form 6 में बदलाव, मतदाता डेटा और अन्य प्रशासनिक विषयों का उल्लेख किया गया। चुनाव आयोग ने इन टिप्पणियों को अंतिम निर्णय से अलग बताते हुए कहा कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया के सामान्य आंतरिक विमर्श का हिस्सा माना जाना चाहिए।
चुनाव आयोग विवाद पर सियासी टकराव जारी
राहुल गांधी के ताजा बयान और बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्षी नेता आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है। दूसरी ओर बीजेपी नेता आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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