Election Commission Action: देशभर में चुनावी व्यवस्था को और अधिक स्वच्छ बनाने के लिए चुनाव आयोग ने शनिवार, 9 अगस्त को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। आयोग ने 334 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) का पंजीकरण रद्द कर दिया। इन दलों का पंजीकरण इसलिए रद्द किया गया क्योंकि इन दलों ने 2019 के बाद से एक भी चुनाव नहीं लड़ा था, जो चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन है।
RUPP वे राजनीतिक दल होते हैं, जिन्हें चुनाव आयोग ने पंजीकृत किया है, लेकिन वे किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हैं। इन दलों को कर छूट जैसे कुछ विशेषाधिकार और सरकारी लाभ मिलते हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, पंजीकरण की एक अनिवार्य शर्त है कि हर दल को कम से कम एक लोकसभा, विधानसभा या उपचुनाव में हिस्सा लेना चाहिए। अगर कोई पार्टी 6 सालों तक चुनाव नहीं लड़ती, तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाता है।
चुनाव आयोग ने जून में इस दिशा में कार्यवाही की शुरुआत की थी, जब यह पाया गया कि 3000 से ज्यादा RUPP में से साढ़े 300 पार्टियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में विफल रही हैं। इसके बाद आयोग ने एक राष्ट्रीय स्तर पर इन पार्टियों की पहचान की और उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा। इन पार्टियों से जवाब मिलने के बाद, यह सामने आया कि 334 पार्टियां 2019 के बाद से किसी भी चुनाव में शामिल नहीं हुई थीं।
चुनाव आयोग ने इन पार्टियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का एक मौका दिया था। इसके लिए संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को निर्देश दिए गए थे कि वे इन दलों को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। इस प्रक्रिया के बाद, आयोग ने 334 पार्टियों के पंजीकरण को रद्द कर दिया।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। अगर कोई पार्टी अगले छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ती है, तो उसे पंजीकृत दलों की सूची से हटा दिया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा कि इन दलों को किसी भी सरकारी लाभ या कर छूट के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। हालांकि, यदि कोई पार्टी इस फैसले से असहमत है, तो वह 30 दिन के भीतर चुनाव आयोग से अपील कर सकती है।
चुनाव आयोग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब 6 राष्ट्रीय दल, 67 राज्य दल और 2854 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल हैं। इन 334 दलों का पंजीकरण रद्द होने के बाद, ये दल अब किसी भी सरकारी लाभ के लिए योग्य नहीं होंगे।
इस कदम का उद्देश्य चुनावी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभ्यास भविष्य में भी जारी रहेगा ताकि ऐसे राजनीतिक दलों को सूची से हटाया जा सके, जो चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेते हैं।
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