फर्जी “गोयल अस्पताल” के नाम पर आयुष्मान योजना में ठगी, अधिकारियों की मिलीभगत पर उठे सवाल

Ambikapur News : गरीबों और असहायों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरगुजा जिले में “गोयल अस्पताल” नाम से संचालित एक निजी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने फर्जी करार दिया है। नोडल अधिकारी राजेश भागवली ने स्पष्ट किया कि जिले में गोयल अस्पताल के नाम से किसी भी निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं है। बावजूद इसके इस अस्पताल में लंबे समय से आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज दिखाकर धन उगाही की जा रही थी। फर्जीवाड़े का तरीका सूत्रों के मुताबिक इस अस्पताल से जुड़े एजेंट और गुर्गे गांव-गांव जाकर भोले-भाले ग्रामीणों से आधार कार्ड नंबर और आयुष्मान कार्ड की जानकारी लेते थे। इसके बाद स्वस्थ व्यक्तियों को भी बिस्तर पर लेटा कर “मरीज” दिखाया जाता और योजना के पैसे की बंदरबांट होती। ग्रामीणों के मुताबिक यहां इलाज से ज्यादा ठगी, अवैध वसूली और धमकी-चमकी का कारोबार बेखौफ तरीके से चल रहा था। अधिकारियों पर सवाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना नर्सिंग होम लाइसेंस और रजिस्टर्ड दस्तावेज के यह अस्पताल सालों से कैसे योजना चला रहा था? जबकि आयुष्मान योजना पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित है। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी जिला कंसल्टेंट और शाखा के अन्य कर्मचारियों पर है। कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं : 🔴 जब अस्पताल का नाम बदला गया तो किसकी मिलीभगत से आयुष्मान योजना का अकाउंट नंबर बदला गया? 🔴 बिना जरूरी दस्तावेज लगाए किस आधार पर अस्पताल में योजना चालू रही? 🔴 क्या पुराने ID से ही योजना जारी रखी गई या नया ID जारी किया गया? अगर नया ID दिया गया तो आवश्यक दस्तावेज क्यों नहीं लिए गए? 🔴 जब कई सालों से यह अस्पताल योजना चला रहा था तो क्या जिला कंसल्टेंट या नोडल अधिकारी ने कभी विज़िट नहीं किया? 🔴 यदि विज़िट हुआ तो फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा? और यदि विज़िट ही नहीं हुआ तो यह गंभीर लापरवाही किसकी है? 🔴 क्या इस दौरान ऑनलाइन मॉनिटरिंग और मासिक रिपोर्टिंग भी नहीं हो रही थी? 🔴 गोयल हॉस्पिटल संचालक पर अब तक FIR क्यूं नहीं? अनियमितताओं का लंबा इतिहास आरोप है कि जिला कंसल्टेंट लगभग 15 सालों से पद पर जमे हुए हैं और अब तक उनका तबादला नहीं हुआ। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले भी उदयपुर और लखनपुर ब्लॉक के लोगों ने उनके खिलाफ शिकायतें की थीं, लेकिन किसी तरह की कार्यवाही नहीं हुई। अब जांच और कार्रवाई की मांग नोडल अधिकारी डा. भजगावली ने बताया कि पूर्व में इस जगह HR हेल्थ केयर नामक अस्पताल संचालित था, जो रजिस्टर्ड था। लेकिन वर्तमान में यहां गोयल अस्पताल नाम से अवैध रूप से संचालन हो रहा है। उन्होंने जांच कर कार्यवाही की बात कही है। “ सीएमएचओ डा. प्रेम सिंह मार्को ने बताया कि डा. पीके सिन्हा के नेतृत्व में जांच टीम बनाई गई है। जांच टीम सोमवार को गोयल हॉस्पिटल गई थी। लेकिन वहां कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। डा. निधि गोयल से बार-बार सम्पर्क किया गया लेकिन वे टालती रहीं मौके पर नहीं पहुँची। सीएमएचओ ने बताया कि जांच दल ने मौके पर पाया कि सारे सामान हटाये जा रहे थे और हॉस्पिटल का बोर्ड तो लगा हुआ था लेकिन बेड, टेबल-कुर्सी इत्यादि हटाये जा रहे थे। उन्होंने कहा कि जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी जाएगी। “ किसानों और आम लोगों की तरह गरीब मरीज भी इस फर्जीवाड़े का शिकार बने हैं। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी ठगी और अवैध उगाही का खेल इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा? और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे रहे? सरगुजा जिले में यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग केवल कागजों में सीमित रह गई है। अब देखना होगा कि इस फर्जी अस्पताल और इसमें मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है। “मेरे संज्ञान में मामला आते ही तत्काल नियमानुसार कार्रवाई के लिए सीएमएचओ और नोडल अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं तथा राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी को भी अवगत कराया गया है। इस तरह की यदि कहीं भी नियम विपरीत कोई जानकारी मिलती है तो अवश्य सूचित करें। पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो नोडल अधिकारी को भी हटाया जाएगा। इससे पहले भी शिकायत आने पर एनएचए के नोडल अधिकारी को हटाया गया था। जनहित के खिलाफ कोई भी कार्य होगा तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।“ डॉ. अनिल शुक्ला संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा।

Ambikapur News : गरीबों और असहायों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरगुजा जिले में “गोयल अस्पताल” नाम से संचालित एक निजी अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने फर्जी करार दिया है। नोडल अधिकारी राजेश भागवली ने स्पष्ट किया कि जिले में गोयल अस्पताल के नाम से किसी भी निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं है। बावजूद इसके इस अस्पताल में लंबे समय से आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज दिखाकर धन उगाही की जा रही थी।

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फर्जीवाड़े का तरीका

TheTarget365 – देश-दुनिया की हर खबरसूत्रों के मुताबिक इस अस्पताल से जुड़े एजेंट और गुर्गे गांव-गांव जाकर भोले-भाले ग्रामीणों से आधार कार्ड नंबर और आयुष्मान कार्ड की जानकारी लेते थे। इसके बाद स्वस्थ व्यक्तियों को भी बिस्तर पर लेटा कर “मरीज” दिखाया जाता और योजना के पैसे की बंदरबांट होती। ग्रामीणों के मुताबिक यहां इलाज से ज्यादा ठगी, अवैध वसूली और धमकी-चमकी का कारोबार बेखौफ तरीके से चल रहा था।

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अधिकारियों पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना नर्सिंग होम लाइसेंस और रजिस्टर्ड दस्तावेज के यह अस्पताल सालों से कैसे योजना चला रहा था? जबकि आयुष्मान योजना पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम पर आधारित है। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी जिला कंसल्टेंट और शाखा के अन्य कर्मचारियों पर है।

कुछ सवाल जिनके जवाब जरूरी हैं :

🔴 जब अस्पताल का नाम बदला गया तो किसकी मिलीभगत से आयुष्मान योजना का अकाउंट नंबर बदला गया?

🔴 बिना जरूरी दस्तावेज लगाए किस आधार पर अस्पताल में योजना चालू रही?

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🔴 क्या पुराने ID से ही योजना जारी रखी गई या नया ID जारी किया गया? अगर नया ID दिया गया तो आवश्यक दस्तावेज क्यों नहीं लिए गए?

🔴 जब कई सालों से यह अस्पताल योजना चला रहा था तो क्या जिला कंसल्टेंट या नोडल अधिकारी ने कभी विज़िट नहीं किया?

🔴 यदि विज़िट हुआ तो फर्जीवाड़ा कैसे चलता रहा? और यदि विज़िट ही नहीं हुआ तो यह गंभीर लापरवाही किसकी है?

🔴 क्या इस दौरान ऑनलाइन मॉनिटरिंग और मासिक रिपोर्टिंग भी नहीं हो रही थी?

🔴 गोयल हॉस्पिटल संचालक पर अब तक FIR क्यूं नहीं?

अनियमितताओं का लंबा इतिहास

आरोप है कि जिला कंसल्टेंट लगभग 15 सालों से पद पर जमे हुए हैं और अब तक उनका तबादला नहीं हुआ। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो रहे हैं। पहले भी उदयपुर और लखनपुर ब्लॉक के लोगों ने उनके खिलाफ शिकायतें की थीं, लेकिन किसी तरह की कार्यवाही नहीं हुई।

अब जांच और कार्रवाई की मांग

नोडल अधिकारी डा. भजगावली ने बताया कि पूर्व में इस जगह HR हेल्थ केयर नामक अस्पताल संचालित था, जो रजिस्टर्ड था। लेकिन वर्तमान में यहां गोयल अस्पताल नाम से अवैध रूप से संचालन हो रहा है। उन्होंने जांच कर कार्यवाही की बात कही है।

“ सीएमएचओ डा. प्रेम सिंह मार्को ने बताया कि डा. पीके सिन्हा के नेतृत्व में जांच टीम बनाई गई है। जांच टीम सोमवार को गोयल हॉस्पिटल गई थी। लेकिन वहां कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। डा. निधि गोयल से बार-बार सम्पर्क किया गया लेकिन वे टालती रहीं मौके पर नहीं पहुँची। सीएमएचओ ने बताया कि जांच दल ने मौके पर पाया कि सारे सामान हटाये जा रहे थे और हॉस्पिटल का बोर्ड तो लगा हुआ था लेकिन बेड, टेबल-कुर्सी इत्यादि हटाये जा रहे थे। उन्होंने कहा कि जल्द ही जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी जाएगी। “

किसानों और आम लोगों की तरह गरीब मरीज भी इस फर्जीवाड़े का शिकार बने हैं। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी ठगी और अवैध उगाही का खेल इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा? और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे रहे?

सरगुजा जिले में यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग केवल कागजों में सीमित रह गई है। अब देखना होगा कि इस फर्जी अस्पताल और इसमें मिलीभगत करने वाले अधिकारियों पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है।

“मेरे संज्ञान में मामला आते ही तत्काल नियमानुसार कार्रवाई के लिए सीएमएचओ और नोडल अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं तथा राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी को भी अवगत कराया गया है। इस तरह की यदि कहीं भी नियम विपरीत कोई जानकारी मिलती है तो अवश्य सूचित करें। पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

यदि आवश्यक हुआ तो नोडल अधिकारी को भी हटाया जाएगा। इससे पहले भी शिकायत आने पर एनएचए के नोडल अधिकारी को हटाया गया था। जनहित के खिलाफ कोई भी कार्य होगा तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।“

डॉ. अनिल शुक्ला
संयुक्त संचालक
स्वास्थ्य सेवाएं सरगुजा।

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