Bhiwani Manisha Case : हरियाणा के भिवानी में एक प्राइवेट स्कूल की शिक्षिका मनीषा की मौत को लेकर पिछले एक हफ्ते से हंगामा जारी है। शुरुआत में इस मामले को रेप और मर्डर का रूप दिया गया था, लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को पलट दिया है। रिपोर्ट में साफ हुआ है कि मनीषा के साथ न तो दुष्कर्म हुआ और न ही उसका गला रेता गया। बल्कि, उसकी मौत जहर खाने से हुई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निकला?
पुलिस के अनुसार मनीषा का पोस्टमार्टम भिवानी और रोहतक दोनों जगह कराया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि उसके शरीर से कीटनाशक के अंश मिले हैं। पीजीआई के एमएस डॉ. कुंदन मित्तल ने पुष्टि की कि मनीषा ने कीड़े मारने की दवा खाई थी। रिपोर्ट में रेप के कोई साक्ष्य नहीं मिले।बॉडी पर सीमन नहीं पाया गया।चेहरे पर एसिड या केमिकल के निशान भी नहीं मिले।आंख और गर्दन पर जो चोटें थीं, वे संभवतः जानवरों द्वारा नोंचने से हुईं।इसके अलावा, पुलिस ने यह भी बताया कि मनीषा का सुसाइड नोट उसकी लिखावट से मैच कर गया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?
मामला 11 अगस्त को शुरू हुआ, जब भिवानी के सिंघानी गांव की रहने वाली मनीषा लापता हो गई। वह एक प्ले स्कूल की टीचर थी और उसी दिन नर्सिंग कॉलेज गई थी। लेकिन घर नहीं लौटी।परिजनों का आरोप है कि जब वे लोहारू पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और कहा कि “लड़की खुद भाग गई होगी।” दो दिन बाद 13 अगस्त को उसका शव गांव के खेत में मिला। मनीषा के परिजनों और गांववालों का आरोप है कि अगर पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो मनीषा की जान बच सकती थी। शव मिलने के बाद गांव में आक्रोश फैल गया और आंदोलन शुरू हो गया। परिजन लगातार “हत्यारों की गिरफ्तारी” की मांग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भिवानी के SP का ट्रांसफर कर दिया और 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। सैनी ने कहा—
“मनीषा हमारी बेटी थी। परिवार को न्याय मिलेगा। आरोपी चाहे जो हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।” अब जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह सामने आया है कि यह मामला हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या का है, पूरा घटनाक्रम नया मोड़ ले चुका है। पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है, लेकिन स्थानीय लोग अब भी आश्वस्त नहीं हैं और उनका कहना है कि पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
सोशल और पॉलिटिकल दबाव
यह केस हरियाणा में एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि पुलिस की लापरवाही से एक जान गई। वहीं, सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा में है और लोग #JusticeForManisha की मांग कर रहे हैं। भिवानी की मनीषा केस में शुरुआती आरोपों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्षों में बड़ा अंतर है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस जांच किस दिशा में जाती है और क्या मनीषा के परिवार को वह न्याय मिल पाएगा जिसकी उन्हें उम्मीद है।










