Hepatitis Prevention Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली का सबसे ज्यादा असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक लिवर पर पड़ रहा है। भारत के बड़े शहरों में फैटी लिवर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पहले माना जाता था कि लिवर की बीमारी केवल ज्यादा शराब पीने वाले लोगों को होती है, लेकिन अब यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है।विशेषज्ञों के अनुसार, खराब खानपान, मोटापा, डायबिटीज, शारीरिक गतिविधि की कमी और हेपेटाइटिस वायरस जैसे कारणों से भी बड़ी संख्या में लोग लिवर संबंधी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। समय पर जांच और स्वस्थ आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

हेपेटाइटिस से बचाव के लिए टीकाकरण है जरूरी
लिवर को प्रभावित करने वाली हेपेटाइटिस बीमारी से बचने के लिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार, हेपेटाइटिस A और B से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। समय पर वैक्सीन लगवाने से संक्रमण का खतरा काफी कम किया जा सकता है।इसके अलावा साफ और सुरक्षित भोजन के साथ शुद्ध पानी का सेवन करना चाहिए। दूषित खाना और गंदा पानी हेपेटाइटिस संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं। बाहर का अस्वच्छ भोजन खाने से बचना और खाने से पहले स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है।

व्यक्तिगत चीजें साझा करने से बचें
हेपेटाइटिस संक्रमण से बचने के लिए अपनी व्यक्तिगत वस्तुओं को किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। रेजर, टूथब्रश, नेल कटर और सुई जैसी चीजों के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए।विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस B संक्रमण असुरक्षित यौन संबंधों के जरिए भी फैल सकता है। इसलिए सुरक्षित संबंध बनाना और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करना जरूरी है। इसके अलावा शराब और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि ये लिवर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।
किन लोगों को करानी चाहिए हेपेटाइटिस की जांच
हर व्यक्ति के लिए नियमित हेपेटाइटिस जांच जरूरी नहीं होती, लेकिन कुछ लोगों को समय-समय पर जांच जरूर करानी चाहिए। जिन लोगों का कभी ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ हो, जो डायलिसिस पर हों, स्वास्थ्यकर्मी हों या गर्भवती महिलाएं हों, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।इसके अलावा हेपेटाइटिस संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्यों और उन लोगों को भी जांच करवानी चाहिए जिनकी पहले लिवर टेस्ट रिपोर्ट खराब आ चुकी है। लंबे समय तक थकान, पीलिया, भूख कम लगना, उल्टी जैसा महसूस होना या लिवर एंजाइम बढ़ना जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए।
हेपेटाइटिस B और C लंबे समय तक रह सकते हैं बिना लक्षणों के
हेपेटाइटिस B और C संक्रमण कई बार शरीर में लंबे समय तक मौजूद रहता है, लेकिन इसके लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में जोखिम वाले लोगों में समय पर जांच करवाना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।समय रहते बीमारी की पहचान होने पर इलाज शुरू किया जा सकता है और लिवर को गंभीर नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।
शराब नहीं पीने वालों में भी बढ़ रहा फैटी लिवर
आजकल फैटी लिवर की समस्या उन लोगों में भी तेजी से बढ़ रही है जो शराब का सेवन नहीं करते। इसका मुख्य कारण खराब खानपान और निष्क्रिय जीवनशैली है।ज्यादा तला-भुना भोजन, जंक फूड, मीठे पेय पदार्थ, बढ़ता वजन, पेट की चर्बी, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत फैटी लिवर का कारण बन सकती है।अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो फैटी लिवर धीरे-धीरे लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ गंभीर मामलों में लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है।
लिवर को मजबूत रखने के लिए अपनाएं स्वस्थ आदतें
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना कम से कम 30 मिनट तक पैदल चलना या व्यायाम करना फायदेमंद होता है।वजन और कमर के आकार को नियंत्रण में रखना चाहिए। शराब और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाना भी लिवर की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
बिना सलाह दवा लेने से लिवर को हो सकता है नुकसान
कई लोग छोटी समस्या होने पर खुद से दर्द की दवाइयां, एंटीबायोटिक या हर्बल सप्लीमेंट लेना शुरू कर देते हैं। लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच के जरिए लिवर को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।
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