Gardening Tips : अनार स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिक फलों में भी शामिल है। इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सीडेंट शरीर के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। यही वजह है कि अनार की मांग पूरे साल बनी रहती है। अधिकांश लोगों को लगता है कि अनार की खेती केवल बड़े खेत या बगीचे में ही संभव है, लेकिन ऐसा नहीं है। यदि आपके घर में छत, बालकनी, आंगन या थोड़ी सी खुली जगह उपलब्ध है, तो आप बड़े गमले में भी अनार का पौधा सफलतापूर्वक उगा सकते हैं। सही तकनीक अपनाने और नियमित देखभाल करने से यह पौधा कुछ समय बाद फूल और स्वादिष्ट फल देना शुरू कर देता है।

नर्सरी से स्वस्थ पौधा खरीदना रहेगा बेहतर विकल्प
यदि आप जल्दी और अच्छी गुणवत्ता वाले फल चाहते हैं, तो बीज से पौधा तैयार करने की बजाय किसी विश्वसनीय नर्सरी से स्वस्थ और विकसित सैपलिंग खरीदना अधिक लाभदायक रहेगा। बीज से तैयार पौधे को फल देने में अधिक समय लगता है, जबकि ग्राफ्टेड या तैयार पौधा अपेक्षाकृत कम समय में फल देना शुरू कर देता है। पौधा खरीदते समय उसकी जड़ें मजबूत हों, पत्तियां हरी हों और किसी प्रकार के रोग या कीट का असर न दिखाई दे, इसका विशेष ध्यान रखें।

सही गमला और मिट्टी का चयन बेहद जरूरी
अनार का पौधा लगाने के लिए कम से कम 18 से 24 इंच का बड़ा गमला, प्लास्टिक ड्रम या मजबूत बाल्टी का इस्तेमाल करना चाहिए। जड़ों के अच्छे विकास के लिए पर्याप्त जगह होना जरूरी है। गमले के नीचे पानी निकासी के लिए कई छेद होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो और जड़ें सड़ने से बच सकें।
मिट्टी तैयार करते समय बगीचे की उपजाऊ मिट्टी, कोकोपीट, अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या होम कंपोस्ट तथा वर्मीकंपोस्ट को बराबर मात्रा में मिलाएं। बेहतर पोषण के लिए इसमें थोड़ी मात्रा में नीम खली और बोन मील भी मिलाया जा सकता है। इससे पौधे की शुरुआती वृद्धि तेज होती है और जड़ें मजबूत बनती हैं।
पौधा लगाने की सही प्रक्रिया अपनाएं
गमले के सबसे निचले हिस्से में सूखे पत्तों या छोटे पत्थरों की हल्की परत बिछाएं ताकि ड्रेनेज बेहतर बना रहे। इसके ऊपर तैयार मिट्टी की परत डालें और गमले को कुछ दिनों तक छोड़ दें। इसके बाद नर्सरी से लाए गए पौधे को सावधानीपूर्वक लगाएं। पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी जड़ों से अच्छी तरह चिपक जाए।

धूप और सिंचाई का रखें विशेष ध्यान
अनार का पौधा भरपूर धूप पसंद करता है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखें, जहां प्रतिदिन कम से कम 6 से 8 घंटे सीधी धूप मिल सके। शुरुआती दिनों में रोज हल्की सिंचाई करें, लेकिन पानी इतना न दें कि मिट्टी में जलभराव हो जाए। अधिक पानी से जड़ों में सड़न की समस्या पैदा हो सकती है। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए ऊपर सूखे पत्ते या नारियल की भूसी की मल्चिंग भी की जा सकती है।
नियमित खाद और कीट नियंत्रण से बढ़ेगी पैदावार
हर 30 से 40 दिन के अंतराल पर पौधे में जैविक खाद या सड़ी हुई गोबर की खाद डालते रहें। इससे पौधे को लगातार आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहेंगे। यदि पत्तियों पर कीट या फफूंद का असर दिखाई दे, तो नीम के तेल का घोल बनाकर छिड़काव करें। यह प्राकृतिक तरीका पौधे को नुकसान पहुंचाए बिना कीटों को नियंत्रित करने में काफी प्रभावी माना जाता है।
प्रूनिंग से बढ़ती है फूल और फलों की संख्या
अनार के पौधे की नियमित प्रूनिंग करना भी बेहद जरूरी होता है। जब पौधा लगभग 2 से 3 फीट ऊंचा हो जाए, तो उसकी ऊपरी बढ़त को हल्का काट दें। इससे नई शाखाएं निकलती हैं और पौधा अधिक घना बनता है। सूखी, कमजोर और रोगग्रस्त टहनियों को समय-समय पर हटाते रहें। इससे पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और फलों के विकास में लगती है।
थोड़ी मेहनत से मिलेगा ताजा और ऑर्गेनिक अनार
यदि पौधे को पर्याप्त धूप, संतुलित पानी, समय-समय पर जैविक खाद और नियमित देखभाल मिलती रहे, तो गमले में लगा अनार का पौधा भी बेहतरीन गुणवत्ता के फल दे सकता है। थोड़े धैर्य और सही तकनीक के साथ आप अपने घर पर ही ताजा, सुरक्षित और ऑर्गेनिक अनार का आनंद ले सकते हैं। होम गार्डनिंग की शुरुआत करने वालों के लिए अनार एक बेहतरीन और कम देखभाल वाला फलदार पौधा साबित हो सकता है।
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