Independence Day 2026: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को अंतरिक्ष से एक बेहद खास बधाई संदेश मिला। पृथ्वी से करीब 421 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में मौजूद रूसी कॉस्मोनॉट्स ने भारतीय तिरंगा हाथ में लेकर देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। अंतरिक्ष से आया यह संदेश भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों और अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की मजबूत तस्वीर पेश करता है।

रूसी कॉस्मोनॉट्स ने दी भारतवासियों को शुभकामनाएं
रूसी कॉस्मोनॉट्स का एक वीडियो संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने भारत के स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई दी। कॉस्मोनॉट प्योत्र दुबरोव ने अपने संदेश की शुरुआत भारतीयों को संबोधित करते हुए की और भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय जनता के लिए शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की। तिरंगे के साथ दिया गया यह संदेश दोनों देशों की दोस्ती को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक ले गया।

अंतरिक्ष सहयोग को बताया रिश्तों का मजबूत आधार
रूसी कॉस्मोनॉट्स ने अपने संदेश में भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी साझेदारी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को लगातार मजबूत किया है। दशकों से चल रहा यह सहयोग आज भी नई परियोजनाओं और अभियानों के जरिए आगे बढ़ रहा है।
यूरी गागरिन से जुड़ी भारत की ऐतिहासिक यादें
रूसी कॉस्मोनॉट्स ने भारत के स्वतंत्रता दिवस को मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सोवियत संघ के महान कॉस्मोनॉट यूरी गागरिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा को 65 वर्ष पूरे हो रहे हैं। गागरिन ने अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मानव के रूप में इतिहास रचा था। वर्ष 1961 में भारत की उनकी यात्रा ने भारत और सोवियत संघ के बीच बढ़ती दोस्ती को भी नई पहचान दी थी।
‘सच्चे दोस्तों का देश’ बताया था भारत
कॉस्मोनॉट्स ने यूरी गागरिन के भारत से जुड़े एक प्रसिद्ध विचार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गागरिन ने भारत की खूबसूरती की प्रशंसा करते हुए कहा था कि यह अंतरिक्ष से सुंदर दिखाई देता है, लेकिन धरती पर उससे भी ज्यादा खूबसूरत है, क्योंकि भारत ‘सच्चे दोस्तों’ का देश है। गागरिन की यह भावना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की गर्मजोशी को दर्शाती है।

आर्यभट्ट से शुरू हुआ अंतरिक्ष सहयोग
भारत और रूस के अंतरिक्ष सहयोग का इतिहास कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से जुड़ा है। वर्ष 1975 में सोवियत संघ ने भारत के पहले उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ को अंतरिक्ष में लॉन्च किया था। यह उपलब्धि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी। इस लॉन्च ने भारत और सोवियत संघ के बीच वैज्ञानिक तथा अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत आधार प्रदान किया।
राकेश शर्मा की अंतरिक्ष यात्रा बनी ऐतिहासिक उपलब्धि
करीब एक दशक बाद वर्ष 1984 में भारतीय वायुसेना के अधिकारी राकेश शर्मा सोयुज T-11 अंतरिक्ष यान के जरिए अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। उनकी अंतरिक्ष यात्रा भारत और सोवियत संघ के बीच सहयोग की एक ऐतिहासिक मिसाल बनी। इस उपलब्धि ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और दोनों देशों के आपसी संबंधों को नई ऊंचाई दी।
गगनयान मिशन में भी रूस का सहयोग
रूसी कॉस्मोनॉट अन्ना किकिना ने कहा कि भारत और रूस की अंतरिक्ष साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन का जिक्र किया। भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों यानी गगनयात्रियों को रूस के यूरी गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने इस दौरान भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के योगदान का भी उल्लेख किया।
अंतरिक्ष से और मजबूत हुई दोस्ती की तस्वीर
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर अंतरिक्ष से आया रूसी कॉस्मोनॉट्स का संदेश दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दर्शाता है। तिरंगे के साथ दी गई शुभकामनाओं ने भारत-रूस की पुरानी दोस्ती, वैज्ञानिक साझेदारी और अंतरिक्ष सहयोग को एक साथ सामने रखा। आर्यभट्ट से लेकर राकेश शर्मा और गगनयान तक की यात्रा बताती है कि दोनों देशों का अंतरिक्ष सहयोग लगातार नए मुकाम हासिल कर रहा है।












