Independence Day: भारत इस वर्ष अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस विशेष अंदाज में मनाने जा रहा है। देश की आजादी के 80 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाला समारोह कई मायनों में खास होगा। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहल की जाएगी। लाल किले की प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन समारोह का हिस्सा बनेगा। इसके अलावा कार्यक्रम में देश की युवा शक्ति के योगदान को भी विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा।

लाल किले से पहली बार होगा वंदे मातरम् का गायन
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को लाल किले की प्राचीर से प्रस्तुत किया जाएगा। प्रधानमंत्री के संबोधन और राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत को शामिल करना इस साल की प्रमुख विशेषताओं में से एक होगा। ऐतिहासिक लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों और देश की गौरवशाली यात्रा को याद करने का अवसर भी प्रदान करेगी।

स्वतंत्रता संग्राम में रहा है विशेष योगदान
‘वंदे मातरम्’ का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से बेहद गहरा संबंध रहा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध रचना से निकला यह गीत अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष के दौर में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का प्रतीक बन गया था। आजादी की लड़ाई में इस गीत ने लोगों को एकजुट करने और उनमें राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व के कारण इसे भारत के राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है।
जन गण मन है देश का राष्ट्रगान
भारत में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है। स्वतंत्रता दिवस समारोह में हर वर्ष राष्ट्रगान की प्रस्तुति प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल होती है। इस बार राष्ट्रीय गीत को भी लाल किले के मुख्य समारोह का हिस्सा बनाए जाने से आयोजन को एक अलग पहचान मिलेगी। इससे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय गीत के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री लाल किले से करेंगे संबोधन
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री हर वर्ष लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हैं। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और राष्ट्रगान के साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। देशभर से आए प्रतिनिधि, विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोग और विशेष आमंत्रित अतिथि इस समारोह में शामिल होते हैं। इस बार ‘वंदे मातरम्’ के गायन से कार्यक्रम में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है।

युवाओं की शक्ति को भी मिलेगा सम्मान
80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं के योगदान को भी विशेष महत्व दिया जाएगा। ‘युवा शक्ति’ के जरिए देश के विकास, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य नई पीढ़ी को देश की स्वतंत्रता की ऐतिहासिक यात्रा से जोड़ने के साथ उन्हें भविष्य के भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
वंदे मातरम् विधेयक से जुड़े अहम प्रावधान
हाल ही में संसद के दोनों सदनों से ‘वंदे मातरम्’ से संबंधित विधेयक पारित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। इसके प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना या उसका अपमान करना आपराधिक कृत्य माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान बताया गया है।
राजेंद्र प्रसाद के बयान का भी जिक्र
विधेयक में 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और बराबर दर्जा दिए जाने की बात कही गई थी। प्रस्ताव में यह भी तर्क दिया गया है कि वर्तमान में ऐसा कोई विशेष कानूनी प्रावधान नहीं है, जो राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसके अपमान के मामलों में सीधे कार्रवाई का आधार प्रदान करे।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में जुड़ेगा नया अध्याय
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ की प्रस्तुति देश के स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक विरासत को याद करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान और तिरंगे के साथ होने वाला यह आयोजन देश की एकता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय चेतना के संदेश को सामने रखेगा। युवाओं की भागीदारी और सम्मान के साथ इस वर्ष का समारोह नई पीढ़ी को देश के इतिहास और भविष्य दोनों से जोड़ने वाला विशेष आयोजन बनने की उम्मीद है।
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