Cervical Cancer India : भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी के तेजी से फैलने का सबसे बड़ा कारण समय पर जांच और पहचान का न होना है। अधिकांश मामलों में महिलाएं तब तक जांच नहीं करातीं जब तक बीमारी गंभीर अवस्था में न पहुंच जाए। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी और महंगे टेस्ट भी बताए जाते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि शुरुआती स्तर पर सही जांच हो जाए तो इस कैंसर को काफी हद तक रोका जा सकता है।

HPV संक्रमण और सर्वाइकल कैंसर का मुख्य संबंध
सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का लगातार संक्रमण माना जाता है, विशेषकर उच्च जोखिम वाले HPV प्रकार। यह संक्रमण धीरे-धीरे कोशिकाओं में बदलाव लाकर कैंसर का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते HPV की पहचान कर ली जाए तो बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है। इसी कारण HPV टेस्ट को सबसे सटीक जांच माना जाता है, हालांकि इसकी लागत अधिक होने के कारण यह हर जगह उपलब्ध नहीं है।

सस्ते और प्रभावी जांच विकल्पों की आवश्यकता
नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट झज्जर की प्रमुख और AIIMS की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉक्टर नीरजा भाटला के अनुसार HPV टेस्ट सबसे विश्वसनीय है, लेकिन महंगा होने के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके विपरीत VIA (Visual Inspection with Acetic Acid) टेस्ट सस्ता है, लेकिन इसकी पहुंच और प्रभाव सीमित हैं। ऐसे में सस्ते Point-of-Care (PoC) HPV टेस्ट की आवश्यकता है, जिससे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही जांच संभव हो सके और अधिक महिलाओं तक स्क्रीनिंग पहुंच सके।
Point-of-Care टेस्टिंग से बदल सकता है स्क्रीनिंग मॉडल
डॉक्टर नीरजा के अनुसार Point-of-Care टेस्टिंग ऐसी तकनीक है जिसमें जांच उसी स्थान पर की जाती है और तुरंत परिणाम मिल जाता है। इसमें न सैंपल को लैब भेजने की जरूरत होती है और न ही लंबे इंतजार की। यदि यह सस्ता और आसान HPV टेस्ट उपलब्ध हो जाए तो इसे आशा कार्यकर्ता और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर भी किया जा सकता है। इससे स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ेगा और 2030 तक सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
स्वदेशी रिसर्च और वैश्विक मानकों पर काम
डॉक्टर नीरजा ने बताया कि भारत में विकसित HPV टेस्ट्स पर अध्ययन किया जा रहा है, जो WHO के टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल और IARC मानकों पर आधारित है। इन टेस्ट्स का उद्देश्य सर्वाइकल कैंसर से जुड़े प्रमुख HPV प्रकारों की पहचान करना है। खास बात यह है कि इन परीक्षणों को जिला और उप-जिला स्तर पर उपयोग किया जा सकता है और इन्हें चलाने के लिए बहुत अधिक विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जांच आसान हो सकेगी।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की गंभीर स्थिति
भारत में सर्वाइकल कैंसर एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। हर साल लगभग 1,27,000 नए मामले सामने आते हैं, जिनमें से करीब 80,000 महिलाओं की मौत हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि समय पर स्क्रीनिंग से अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। सरकार की ओर से ब्रेस्ट, ओरल और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनका कवरेज अभी भी सीमित है।
WHO की सिफारिश और भविष्य की दिशा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए HPV टेस्टिंग सबसे प्रभावी तरीका है। यदि उच्च गुणवत्ता वाली जांच उपलब्ध हो तो केवल 35 और 45 वर्ष की उम्र में दो बार स्क्रीनिंग पर्याप्त हो सकती है। हालांकि समस्या यह है कि वर्तमान HPV टेस्ट महंगे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों तक उनकी पहुंच सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सस्ती और सरल जांच तकनीक विकसित हो जाए तो इस बीमारी को बड़े स्तर पर रोका जा सकता है।











