India Economy Ranking :
India Economy Ranking : अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़ों ने वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है। भारत, जो अब तक दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ था, अब फिसलकर छठे स्थान पर आ गया है। ब्रिटेन (UK) ने एक बार फिर भारत को पछाड़कर पांचवें पायदान पर कब्जा कर लिया है। इस रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण भारत की वास्तविक विकास दर में कमी नहीं, बल्कि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना है। साल की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 89.91 के स्तर पर था, जो अब ऐतिहासिक गिरावट के साथ 93.38 रुपये तक पहुंच गया है। चूंकि वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्थाओं का आकार डॉलर में मापा जाता है, इसलिए रुपये की कमजोरी ने भारतीय जीडीपी के कुल मूल्य को कम कर दिया है।
भविष्य के अनुमानों पर नजर डालें तो भारत और ब्रिटेन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। आईएमएफ के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की जीडीपी 3.92 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि ब्रिटेन 4 ट्रिलियन डॉलर के साथ आगे रह सकता है। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी बढ़कर 4.15 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है, लेकिन इसी अवधि में ब्रिटेन की जीडीपी 4.26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह डेटा स्पष्ट करता है कि ब्रिटिश पाउंड की मजबूती और भारतीय मुद्रा में उतार-चढ़ाव ने इस रैंकिंग फेरबदल में निर्णायक भूमिका निभाई है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार में कमी दिखने के पीछे केंद्र सरकार द्वारा ‘बेस ईयर’ (आधार वर्ष) में किया गया बदलाव भी एक तकनीकी कारण है। सरकार ने जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। सांख्यिकीय पैटर्न में इस बदलाव के कारण इकोनॉमी के कुल साइज में 2.8% से 3.8% तक की तकनीकी कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही, वैश्विक कारकों की वजह से डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य गिरा है, जबकि इसके विपरीत ब्रिटिश पाउंड में मजबूती देखी गई है। इन दोनों कारकों ने मिलकर भारत की डॉलर-मूल्य वाली जीडीपी को नीचे धकेल दिया।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल अस्थायी है और भारत की आर्थिक बुनियाद अभी भी मजबूत है। आईएमएफ ने भविष्यवाणी की है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा। उस समय तक भारत न केवल ब्रिटेन बल्कि जापान को भी पीछे छोड़ देगा और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। भारत की विकास दर अभी भी दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बनी हुई है। जैसे ही रुपये की अस्थिरता कम होगी, भारत की डॉलर-जीडीपी में फिर से उछाल देखने को मिलेगा।
वर्तमान में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में शीर्ष छह देशों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को अब अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। केवल उच्च विकास दर हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मुद्रा की वैश्विक मजबूती भी आर्थिक महाशक्ति बनने की दौड़ में महत्वपूर्ण है। भारत को अपनी आयात निर्भरता कम करने, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर अधिक ध्यान देना होगा। वैश्विक रैंकिंग में यह मामूली फेरबदल एक चेतावनी है कि वैश्विक बाजार में मुद्रा का मूल्य राष्ट्र की आर्थिक प्रतिष्ठा को सीधे प्रभावित करता है।
Rajya Sabha Deputy Chairman: भारतीय लोकतंत्र के मंदिर, संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा को…
Bhooth Bangla: बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार की आगामी फिल्म ‘भूत बंगला’ इन दिनों अपनी…
Iran-US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग ने एक बार फिर…
Women's Reservation Update: संसद के विशेष सत्र में इस समय देश की राजनीति का केंद्र…
Pakistan Crisis: पाकिस्तान वर्तमान में एक बेहद गंभीर मानवीय और सामाजिक संकट के दौर से…
T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 को खत्म हुए अभी एक महीने से…
This website uses cookies.