Ujjain Khade Hanuman : धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियां तेज हो गई हैं। महाकाल क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण, ओवरब्रिज और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े काम किए जा रहे हैं। इसी विकास कार्य के दौरान ऐतिहासिक खड़े हनुमान मंदिर की प्राचीन प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का मामला सामने आया, जिसने प्रशासन और स्थानीय लोगों का ध्यान खींच लिया है।
प्रतिमा को स्थानांतरित करने की बनाई गई थी योजना
सड़क चौड़ीकरण की परियोजना के दायरे में मंदिर का कुछ हिस्सा आने के बाद प्रशासन ने मंदिर समिति और स्थानीय लोगों से चर्चा की। इसके बाद प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से कुछ दूरी पर स्थानांतरित करने की योजना तैयार की गई। इसके लिए आधुनिक जैकिंग, हाइड्रोलिक उपकरण और भारी क्षमता वाली मशीनों का इस्तेमाल किया गया। उद्देश्य यह था कि विकास कार्य भी प्रभावित न हो और प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान भी न पहुंचे।
चार प्रयासों के बाद भी नहीं हिली प्रतिमा
प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम ने कथित तौर पर चार बार प्रयास किए। भारी क्षमता वाले हाइड्रोलिक जैक और क्रेन लगाए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी। मंदिर से जुड़े लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि प्रयासों के दौरान मशीनों को भी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद तकनीकी कर्मचारियों और इंजीनियरों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई।
तकनीकी परीक्षण की रिपोर्ट का इंतजार
नगर निगम उपायुक्त संतोष टैगोर के अनुसार, प्रतिमा को विस्थापित करने की कार्रवाई पुजारी की सहमति और मार्गदर्शन में की जा रही थी। उन्होंने बताया कि मंदिर का गुंबद और दीवार हटाने की कार्रवाई पहले की जा चुकी है। इसके बाद प्रतिमा की तकनीकी जांच भी कराई गई है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
सभी पक्षों की सहमति से होगा अगला फैसला
प्रशासन का कहना है कि आगे कोई भी कदम उठाने से पहले संबंधित पक्षों की आपसी सहमति ली जाएगी। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे मार्ग पर विकास कार्य में सभी लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास परियोजना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं और प्रतिमा की सुरक्षा को बनाए रखना है।
संतों और श्रद्धालुओं ने जताया विरोध
प्रतिमा को हटाने के प्रयासों की खबर सामने आने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और साधु-संतों की भीड़ बढ़ने लगी। कई लोगों ने प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की है। कुछ संतों और श्रद्धालुओं ने लगातार असफल हुए प्रयासों को आस्था से जोड़ते हुए इसे हनुमान जी की इच्छा बताया है। हालांकि यह धार्मिक विश्वास है, इसका कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रशासनिक रूप से सामने नहीं आया है।
मंदिर परिसर में बढ़ी हलचल
मामले को लेकर हिंदू संगठनों, साधु-संतों और स्थानीय श्रद्धालुओं में भी नाराजगी देखी जा रही है। मंदिर के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और श्रद्धालु पूजा-पाठ तथा हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा की सुरक्षा की प्रार्थना कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई करने की बात कह रहा है।
विकास और आस्था के बीच प्रशासन के सामने चुनौती
खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा से जुड़ा यह मामला अब उज्जैन में विकास कार्य और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन का विषय बन गया है। एक ओर सिंहस्थ 2028 से पहले शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर प्राचीन मंदिर और प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में आगे का फैसला तकनीकी रिपोर्ट, प्रशासनिक प्रक्रिया और सभी संबंधित पक्षों की सहमति के आधार पर होने की उम्मीद है।
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