Iran Pakistan Talks: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर पहले हुए अंतरिम समझौते के विफल होने के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। इसी बीच कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान का रुख किया है। मंगलवार को ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी ने पाकिस्तान पहुंचकर वहां के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से महत्वपूर्ण मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, मौजूदा संघर्ष और संभावित युद्धविराम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। हालांकि बैठक की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसे क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

युद्धविराम के नए प्रस्ताव पर मंथन
सूत्रों के मुताबिक, मध्यस्थ देशों की पहल पर एक नया अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव में दोनों पक्षों के बीच तत्काल संघर्ष रोकने, समुद्री गतिविधियों को सामान्य बनाने और भविष्य में स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखने पर जोर दिया गया है। प्रस्ताव का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करना और दोनों देशों को संवाद की मेज पर बनाए रखना है। माना जा रहा है कि इस पहल से आगे किसी व्यापक शांति समझौते का रास्ता खुल सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
युद्धविराम प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। प्रस्ताव के तहत दोनों देशों से इस मार्ग को सुरक्षित बनाए रखने और किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि से बचने की अपील की गई है।
शहबाज शरीफ से भी हो सकती है मुलाकात
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी की प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात होने की संभावना है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय संबंधों और युद्धविराम प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। पाकिस्तान लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव कम करने की वकालत करता रहा है और वह इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर दोनों पक्षों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
10 दिन के अस्थायी युद्धविराम पर विचार
मध्यस्थ देशों ने अमेरिका और ईरान के समक्ष 10 दिनों के अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव भी रखा है। इस अवधि का उद्देश्य दोनों देशों को तनाव कम करने और स्थायी समाधान पर बातचीत के लिए समय देना है। सूत्रों का कहना है कि तेहरान इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि यह पहल सफल होती है, तो क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों पर विराम लग सकता है और व्यापक शांति वार्ता की संभावना मजबूत हो सकती है।
कुवैत ने ईरान पर हमले का लगाया आरोप
इस बीच कुवैत ने दावा किया है कि ईरान ने उसके महत्वपूर्ण बिजलीघरों और जल विलवणीकरण संयंत्रों को एक बार फिर निशाना बनाया है। कुवैती बिजली, जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, लगातार चौथे दिन हुए इन हमलों में कुछ संयंत्रों में आग लग गई और उन्हें नुकसान पहुंचा। मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित इकाइयों की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है ताकि आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
जल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ा खतरा
कुवैत की लगभग 90 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति समुद्री जल को शुद्ध करने वाले विलवणीकरण संयंत्रों पर निर्भर करती है। ऐसे में इन प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने से आम नागरिकों के लिए जल संकट की आशंका भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो इसका प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और आम लोगों के दैनिक जीवन पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें पाकिस्तान में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं पर टिकी हैं, जिनसे क्षेत्र में शांति स्थापित होने की उम्मीद की जा रही है।











