Greta Thunberg Arrest: इज़राइली सेना ने गाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता लेकर जा रहे ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला नामक जहाजी बेड़े को रोक दिया है। इस राहत मिशन में शामिल नौकाओं पर स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पाकिस्तान के पूर्व सांसद मुश्ताक अहमद समेत कई देशों के राजनेता, वकील और सोशल एक्टिविस्ट सवार थे।

200 से अधिक लोग हिरासत में
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 45 जहाजों के इस बेड़े में करीब 200 लोगों को इज़राइली सैनिकों ने हिरासत में लिया है। इज़राइली विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो जारी किया है, जिसमें नौकाओं को इज़राइली जलसीमा में रोका जाता दिखाया गया है। वीडियो में ग्रेटा थनबर्ग को डेक पर बैठा और चार इज़राइली सैनिकों से घिरा हुआ भी देखा गया।

मानवीय सहायता या नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश?
इस बेड़े का प्रस्थान सितंबर में स्पेन से हुआ था, और इसका उद्देश्य था गाज़ा में लंबे समय से युद्ध और नाकाबंदी से पीड़ित लोगों को मानवीय सहायता पहुंचाना। हालांकि, इज़राइली सरकार का दावा है कि इन नौकाओं का मुख्य उद्देश्य नाकाबंदी तोड़ना और क्षेत्रीय सुरक्षा को चुनौती देना था।
इज़राइली सेना ने एक बयान में कहा, “ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला के जहाजों को सुरक्षित रूप से रोका गया है और यात्रियों को इज़राइली बंदरगाह पर लाया गया है। सभी लोग सुरक्षित और स्वस्थ हैं।”
ग्रेटा थनबर्ग का पहला बड़ा राजनीतिक गिरफ्तारी मामला
ग्रेटा थनबर्ग, जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक आवाज बन चुकी हैं, इस तरह के किसी अंतरराष्ट्रीय मानवीय मिशन में पहली बार सीधे शामिल हुई हैं। उनकी मौजूदगी ने इस अभियान को वैश्विक मीडिया में प्रमुखता दिलाई। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इज़राइल ने इस तरह के राहत प्रयासों को बलपूर्वक रोका हो।
500 से ज्यादा सांसद और एक्टिविस्ट जुड़े थे
ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 500 से अधिक सांसदों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त था। इसका उद्देश्य केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि गाज़ा की नाकाबंदी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध भी था।
गाज़ा में हालात गंभीर
गाज़ा में वर्षों से जारी संघर्ष और हालिया इज़राइली हमलों के कारण हालात बेहद मानवीय संकट में तब्दील हो चुके हैं। खाद्य, दवाइयों और जरूरी संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में ये नौकाएं उम्मीद की किरण के रूप में देखी जा रही थीं।इज़राइल द्वारा ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला को रोके जाने और उसमें सवार अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर गाज़ा संकट को वैश्विक बहस का केंद्र बना दिया है। यह घटना मानवीय सहायता और राजनीतिक विरोध के बीच की महीन रेखा को भी उजागर करती है।
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