Kanha Tiger Reserve: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve – KTR) से चिंताजनक खबर सामने आई है। बीते 24 घंटों के भीतर रिजर्व क्षेत्र में एक वयस्क नर बाघ और दो मादा शावकों की मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह सभी मौतें क्षेत्रीय संघर्ष (Territorial Fight) का नतीजा हैं।

‘बालाघाट मेल टाइगर’ की हुई मौत
मृत वयस्क बाघ की पहचान प्रसिद्ध “बालाघाट मेल टाइगर” के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग 8 से 10 वर्ष बताई जा रही है। यह बाघ अक्सर पर्यटकों द्वारा देखा जाता था और रिजर्व का एक प्रमुख चेहरा बन गया था। उसकी लाश मुखी रेंज में गुरुवार को मिली।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, बाघ की मौत गले (trachea) पर गहरे घाव के कारण हुई, जो संभवतः दूसरे बाघ के हमले में लगे थे।

एक अधिकारी ने बताया कि यह बाघ पिछले कुछ दिनों से बफर ज़ोन में देखा जा रहा था और संभवतः वह गलती से कोर ज़ोन में प्रवेश कर गया, जहाँ किसी अन्य नर बाघ ने उसे मार डाला।
दो मादा शावक भी मारी गईं
इसी दिन, कान्हा रेंज में दो मादा शावकों के शव भी बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि इनकी भी मौत एक वयस्क नर बाघ के हमले में हुई। इन शावकों की उम्र लगभग 1 से 1.5 वर्ष बताई जा रही है।
मृत बाघों का अंतिम संस्कार नियमों के अनुसार
तीनों मृत बाघों के शवों का राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत पोस्टमॉर्टम के बाद दाह संस्कार कर दिया गया। अधिकारी इस घटना को प्राकृतिक चयन और बाघों की प्रादेशिक प्रवृत्ति का हिस्सा मान रहे हैं, लेकिन लगातार तीन मौतों ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या सबसे अधिक
गौरतलब है कि 2022 की बाघ गणना के अनुसार, मध्य प्रदेश में 785 बाघ हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। इनमें से 137 बाघ अकेले कान्हा टाइगर रिजर्व में पाए जाते हैं, जिससे यह राज्य का सबसे प्रमुख बाघ अभ्यारण्य बनता है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में एक ही दिन में तीन बाघों की मौत ने वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना जहां बाघों के स्वाभाविक व्यवहार को दर्शाती है, वहीं बाघों के आपसी संघर्ष और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के गंभीर पहलू को भी उजागर करती है। वन विभाग को ऐसे संघर्षों की समय रहते पहचान कर संरक्षण नीति को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।











