छत्तीसगढ़

Korba bridge: छत्तीसगढ़ के कोरबा में गजब की चोरी, चोरों ने रातों-रात उड़ा लिया 60 फीट लंबा लोहे का पुल

Korba bridge: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था और प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चोरों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे छोटी-मोटी चीजों के बजाय सीधे सरकारी बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। शहर के बीचों-बीच स्थित हसदेव बायां किनारा नहर पर बना एक विशाल लोहे का पुल रातों-रात गायब हो गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात 11 बजे तक यह पुल अपनी जगह पर अडिग था और लोग इसका इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन सूरज की पहली किरण के साथ जब ग्रामीण वहां पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां पुल की जगह सिर्फ खाली स्थान और कटे हुए लोहे के अवशेष बचे थे।

गैस कटर का इस्तेमाल और पेशेवर अंदाज: 40 साल पुराना ढांचा उखाड़ फेंका

यह पुल लगभग 40 वर्ष पूर्व वार्ड नंबर 17 के नागरिकों की सुविधा के लिए बनाया गया था। यह सिर्फ लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र की लाइफलाइन था। भारी गर्डर और मजबूत लोहे की प्लेटों से निर्मित यह पुल इतना शक्तिशाली था कि दशकों के मौसम की मार झेलने के बाद भी टस से मस नहीं हुआ था। हालांकि, चोरों ने इसे बेहद पेशेवर तरीके से निशाना बनाया। मौके पर मिले सबूतों से पता चलता है कि चोरों ने आधुनिक गैस कटर का उपयोग किया था। उन्होंने पुल को दोनों सिरों से इतनी सफाई से काटा कि आसपास के लोगों को भनक तक नहीं लगी। जिस तरह से भारी-भरकम गर्डर को काटकर ले जाया गया, वह किसी बड़ी गैंग की सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।

प्रशासन में हड़कंप: वार्ड पार्षद की शिकायत के बाद SIT का गठन

सुबह जैसे ही इस चोरी की खबर फैली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस घटना को प्रशासन की नाक के नीचे हुई एक बड़ी चुनौती बताया। पार्षद ने अविलंब कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ तिवारी से लिखित शिकायत की। एक 30 टन वजनी पुल का गायब होना कोई मामूली बात नहीं है, इसके लिए बड़े ट्रकों और क्रेन का इस्तेमाल किया गया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन हरकत में आया है और अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से जांच कर रही है।

स्क्रैप माफिया का हाथ होने का संदेह: 15 लाख की संपत्ति पर थी नजर

स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस चोरी के पीछे शहर में सक्रिय संगठित स्क्रैप माफिया का हाथ है। गायब हुए पुल का वजन लगभग 25 से 30 टन बताया जा रहा है, जिसकी खुले बाजार में कीमत 15 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। हालांकि पुलिस विभाग अक्सर जिले में अवैध कबाड़ कारोबार पर लगाम लगाने का दावा करता है, लेकिन इस घटना ने उन दावों की हकीकत बयां कर दी है। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ स्थानीय कबाड़ियों के गोदामों और ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और उन रास्तों की पहचान कर रही है जहां से इतने भारी मलबे को ले जाया गया होगा।

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