Raigarh News : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद विचलित करने वाली और दुखद खबर सामने आई है। यहां सोमवार की रात को एक भीषण हादसे में एक मासूम वन्यजीव की जान चली गई। घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चारमार गांव के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय एक शावक हाथी तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गया। इस टक्कर में हाथी गंभीर रूप से जख्मी हो गया था। वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और डॉक्टरों की देखरेख में रातभर उसका इलाज कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मंगलवार की सुबह इस बेजुबान ने दम तोड़ दिया।

दर्द से कराहता रहा वन्यजीव
वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ट्रेन की चपेट में आए मृत हाथी की उम्र महज 5 वर्ष के आस-पास बताई जा रही है। मालगाड़ी के साथ हुई भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि हाथी के शरीर के पिछले हिस्से और कमर में बेहद गंभीर चोटें आई थीं। रीढ़ की हड्डी और कमर का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण वह चाहकर भी उठने या खड़ा होने में पूरी तरह असमर्थ था। इसके अलावा हादसे में उसका पिछला पैर भी फ्रैक्चर हो गया था और घाव गहरे होने की वजह से रातभर उसके शरीर से लगातार खून बहता रहा।

हाथियों के दल का रेल सफर
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना सोमवार रात की है जब करीब 10 हाथियों का एक बड़ा झुंड भोजन और पानी की तलाश में चारमार क्षेत्र के घने जंगलों से गुजर रहा था। जंगल के बीच से गुजरने वाली रेलवे पटरी को पार करके जब यह दल आगे बढ़ रहा था, तभी वहां से एक तेज रफ्तार मालगाड़ी गुजरी। झुंड के बाकी हाथी तो समय रहते पटरी पार कर गए, लेकिन यह छोटा हाथी ट्रेन की रफ्तार का अंदाजा नहीं लगा पाया और उसकी चपेट में आ गया। टक्कर के बाद चीख-पुकार मच गई और बाकी हाथी डरकर जंगल में ओझल हो गए।
मौके पर पहुंचा वन अमला
जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की भनक स्थानीय ग्रामीणों और रेलवे प्रशासन को लगी, उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। खबर मिलते ही उप वन मंडलाधिकारी आशुतोष मंडावा और वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांत सिंह अपनी त्वरित रेस्क्यू टीम के साथ बिना वक्त गंवाए घटनास्थल पर पहुंच गए। वन अमले ने स्थिति की नाजुकता को देखते हुए तत्काल पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम को मौके पर बुलवाया। रात के अंधेरे और जंगली इलाके की चुनौतियों के बीच डॉक्टरों ने घायल हाथी को चारों तरफ से घेरकर आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की।
शरीर को ठंडा रखने के लिए बाल्टी से डाला जाता रहा पानी
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों और वनकर्मियों की टीम ने घायल शावक को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। दर्द और बुखार के कारण हाथी का शरीर लगातार तप रहा था, जिसे सामान्य बनाए रखने और उसे राहत देने के लिए वनकर्मी लगातार बाल्टियों में पानी भरकर उसके शरीर पर डालते रहे ताकि उसकी बॉडी ठंडी रह सके। डॉक्टरों द्वारा उसे जीवन रक्षक दवाएं और ड्रिप भी चढ़ाई गई। पूरी रात चले इस जीवन और मौत के संघर्ष के बाद, आखिरकार मंगलवार की सुबह इलाज के दौरान ही उसने अंतिम सांस ली।
वन विभाग की अगली कार्रवाई
उप वन मंडलाधिकारी आशुतोष मंडावा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हाथी के पिछले हिस्से में आई अंदरूनी और बाहरी चोटें इतनी घातक थीं कि उसे बचाया नहीं जा सका। हाथी की मौत के बाद अब वन विभाग की टीम ने शव का पंचनामा तैयार करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और नियमानुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसके साथ ही, वन विभाग ने एहतियात के तौर पर स्थानीय ग्रामीणों को हाथियों के झुंड से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और रेल पटरियों की तरफ न जाने की सख्त हिदायत दी है।
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