Lata Mangeshkar Death Anniversary
Lata Mangeshkar Death Anniversary: भारतीय संगीत जगत की सबसे चमकती नक्षत्र, लता मंगेशकर की आज पुण्यतिथि है। 28 सितंबर 1929 को इंदौर के एक संगीत प्रेमी परिवार में जन्मीं लता जी ने अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक दुनिया पर राज किया। 6 फरवरी 2022 को 92 वर्ष की आयु में जब उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, तो संगीत के एक युग का अंत हो गया। उन्हें ‘भारत रत्न’ जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया, लेकिन उनकी असली पूंजी वह अटूट प्यार है जो आज भी उन्हें सुनने वाले करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में बरकरार है।
लता मंगेशकर की उपलब्धियां किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। उन्होंने अपने करियर में 14 से अधिक भाषाओं में अपनी मधुर आवाज दी और कुल 50,000 से अधिक गीतों को रिकॉर्ड किया। उनकी विरासत का अंदाजा उनकी किताब ‘लता समग्र’ से लगाया जा सकता है, जिसके अनुसार उन्होंने 5,328 हिंदी फिल्मी गानों के साथ-साथ सैकड़ों गैर-फिल्मी और क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों को स्वर दिया। मराठी, बंगाली, पंजाबी और संस्कृत जैसी भाषाओं में उनके गाए गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने उनके हिंदी क्लासिक्स।
लता जी का जीवन केवल प्रसिद्धियों से भरा नहीं था, बल्कि उन्होंने मौत से भी जंग लड़ी थी। उनके जीवन का सबसे सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब यह पता चला कि 33 साल की उम्र में किसी ने उन्हें धीमा जहर (Slow Poison) देकर मारने की साजिश रची थी। एक साक्षात्कार में उन्होंने स्वयं बताया था कि उस दौरान वे इतनी कमजोर हो गई थीं कि बिस्तर से उठना भी मुश्किल था। हालांकि, डॉक्टरों की सूझबूझ और उनकी अदम्य इच्छाशक्ति ने उन्हें इस संकट से बाहर निकाला और वे पुनः संगीत की साधना में जुट गईं।
लता मंगेशकर की पहचान केवल उनकी आवाज नहीं, बल्कि उनकी सादगीपूर्ण वेशभूषा भी थी। वे हमेशा सफेद बॉर्डर वाली साड़ियों में ही नजर आती थीं। उनका मानना था कि सफेद रंग उन्हें मानसिक शांति देता है और रंगीन कपड़े पहनना उन्हें थोड़ा असहज लगता था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी लिपस्टिक का प्रयोग नहीं किया, क्योंकि उनके पिता घर की महिलाओं का मेकअप करना पसंद नहीं करते थे। उन्होंने ताउम्र अपने पिता के सिद्धांतों का सम्मान किया।
उनकी सादगी के बीच एक खास बात यह थी कि वे हमेशा अपने पैरों में सोने की पायल पहनती थीं। आमतौर पर हिंदू परंपराओं में पैरों में सोना पहनना दुर्लभ माना जाता है, लेकिन लता जी ने एक ज्योतिषी की सलाह पर इसे अपना लिया था। यह उनकी पहचान का एक छोटा लेकिन रोचक हिस्सा बन गया था। उनके लिए संगीत ही पूजा थी, इसलिए रिकॉर्डिंग स्टूडियो में प्रवेश करने से पहले वे हमेशा अपनी चप्पलें बाहर उतार दिया करती थीं।
लता मंगेशकर ने भारतीय पार्श्व गायन को जो ऊंचाई दी, वह अतुलनीय है। ‘करोगे याद तो’, ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ और ‘लुका छुपी’ जैसे गानों ने उन्हें न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके गानों में दर्द, खुशी, देशभक्ति और प्रेम के हर अहसास को गहराई से महसूस किया जा सकता है। लता मंगेशकर केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय संस्कृति का एक ऐसा अभिन्न अंग हैं जिनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों को भी संगीत की प्रेरणा देती रहेगी।
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