Lightning Safety Tips : छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन से पहले ही मौसम ने करवट ले ली है और राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी के साथ बारिश का दौर शुरू हो चुका है। इस बदलते मौसम के साथ ही आकाशीय बिजली (गाज) गिरने की दुखद घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। हाल ही में कांकेर जिले के अंतागढ़ में बिजली की चपेट में आने से तीन ग्रामीणों की असामयिक मौत हो गई। इसके अलावा दंतेवाड़ा, बीजापुर और मनेंद्रगढ़ समेत कई अन्य जिलों से भी लगातार आकाशीय बिजली के हादसों की खबरें आ रही हैं, जिसने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।

विधानसभा के आंकड़ों में मौत का खौफनाक मंजर
राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किए गए हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से कुल 434 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा कारण आकाशीय बिजली ही है। वर्ष 2023 में ही इस आपदा ने 180 लोगों की जान ली थी, जबकि इससे पहले के वर्षों में भी यह आंकड़ा 200 के पार रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण अंचलों में खेतों में काम करने वाले लोग इसका सबसे ज्यादा शिकार होते हैं।

खतरे की घंटी बजते ही ढूंढें पक्की छत
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे ही आसमान में काले बादल छाएं, बिजली कड़कने लगे या बादलों की तेज गड़गड़ाहट सुनाई दे, तो इसे सीधे तौर पर खतरे का संकेत समझना चाहिए। ऐसी स्थिति पैदा होते ही बिना समय गंवाए किसी पक्के मकान, स्कूल, सरकारी कार्यालय या फिर किसी बंद चार पहिया वाहन (कार या जीप) के भीतर चले जाएं। खुले मैदानों, सूनी पहाड़ियों, खेतों और खाली पड़े स्थानों पर रुकना मौत को आमंत्रण देने जैसा है।
पेड़ों के नीचे छिपने की भूल कतई न करें
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में जब अचानक बारिश शुरू होती है, तो लोग बचने के लिए बड़े और घने पेड़ों के नीचे जाकर खड़े हो जाते हैं। यह सबसे घातक फैसला साबित हो सकता है। आकाशीय बिजली हमेशा जमीन पर मौजूद सबसे ऊंची वस्तुओं को अपना पहला निशाना बनाती है। इसलिए किसी अकेले या ऊंचे पेड़ के नीचे खड़े होना सीधे तौर पर जान जोखिम में डालना है।
धातु की वस्तुओं और बिजली के खंभों से रहें दूर
बिजली कड़कने के दौरान लोहे के खंभे, ट्रांसफार्मर, लोहे की बाड़, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और अन्य धातुओं से बनी चीजों से पर्याप्त दूरी बना लेनी चाहिए। चूंकि धातु विद्युत की सुचालक (कंडक्टर) होती है, इसलिए ये आकाशीय बिजली के प्रभाव को तेजी से अपनी ओर खींचती हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका बढ़ जाती है।
जल स्रोतों से तुरंत दूरी बनाना है बेहद जरूरी
यदि आप मौसम खराब होने के समय किसी नदी, तालाब, झील या जलभराव वाले क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं, तो तुरंत वहां से हट जाएं। पानी बिजली का बहुत अच्छा संवाहक माना जाता है। ऐसे में जल स्रोतों पर बिजली गिरने की संभावना सर्वाधिक होती है। बारिश के मौसम में तालाबों में नहाने या मछली पकड़ने जाने से पूरी तरह बचना चाहिए।
घर के भीतर भी बरतनी होगी विशेष सावधानी
कई लोग सोचते हैं कि घर के अंदर आने के बाद वे पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। बिजली चमकने के दौरान घर के कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज और वॉशिंग मशीन का उपयोग बंद कर देना चाहिए और उनके प्लग सॉकेट से निकाल देने चाहिए। इसके अलावा, तार वाले लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करने से भी बचें।
खुले मैदान में फंसने पर अपनाएं उकड़ू मुद्रा
अगर आप किसी ऐसी जगह फंस गए हैं जहां दूर-दूर तक कोई पक्का आश्रय नहीं है, तो जमीन पर सीधे लेटने की गलती बिल्कुल न करें। इसके बजाय, अपने दोनों पैरों को आपस में सटाकर, घुटनों को मोड़कर और सिर को नीचे झुकाकर उकड़ू (स्क्वाट पोजीशन) बैठ जाएं। इससे आपके शरीर का जमीन से संपर्क न्यूनतम हो जाएगा और बिजली की चपेट में आने का खतरा काफी कम हो जाएगा।
सुरक्षा का अचूक मंत्र: हमेशा याद रखें ’30-30 नियम’
मौसम विशेषज्ञों द्वारा सुझाया गया ’30-30 नियम’ जीवन रक्षक साबित हो सकता है। इसके तहत, यदि बिजली चमकने और उसकी गड़गड़ाहट सुनाई देने के बीच का समय 30 सेकंड या उससे कम है, तो समझें कि खतरा बेहद करीब है और तुरंत सुरक्षित स्थान पर भागें। वहीं, आसमान साफ होने के बाद भी आखिरी बार सुनाई दी गड़गड़ाहट के अगले 30 मिनट तक खुले में बाहर न निकलें।
अन्नदाताओं और श्रमिकों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
मानसून की शुरुआत के साथ ही खेतों में बुआई और जुताई का काम तेज हो जाता है। ऐसे में खेतों में काम करने वाले किसान, मनरेगा के मजदूर और निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिक सबसे ऊंचे जोखिम वाले क्षेत्र में होते हैं। मौसम के तेवर बदलते ही इन सभी को तुरंत अपना काम रोक देना चाहिए और किसी सुरक्षित पक्के स्थान पर शरण ले लेनी चाहिए। थोड़ी सी सजगता और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों का पालन करके इस जानलेवा प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकता है।
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