Mallikarjun Kharge : भाजपा नेता शॉपिंग में व्यस्त, खड़गे का तंज, बोले आम आदमी महंगाई से परेशान

Mallikarjun Kharge :  कांग्रेस ने देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति और लगातार बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सत्ता के खेल में दूसरी पार्टियों के नेताओं को ‘खरीदने’ में व्यस्त है, जबकि दूसरी ओर आम आदमी के लिए घर का खर्च चलाना और दैनिक उपयोग की जरूरी चीजें खरीदना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के बोझ तले आम परिवारों की कमर टूट चुकी है। खरगे ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि महंगाई की मार के कारण मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों की बचत तेजी से घट रही है।

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महंगाई की मार: थाली से टमाटर गायब और घटती उम्मीदें

कांग्रेस अध्यक्ष ने आंकड़ों का हवाला देते हुए केंद्र की आर्थिक नीतियों को पूरी तरह विफल बताया। खरगे के अनुसार, खुदरा महंगाई दर पिछले 16 महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 4.78% तक पहुंच चुकी है, जिससे आम आदमी की थाली से टमाटर जैसी बुनियादी सब्जियां भी गायब हो गई हैं। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च यानी मेडिकल महंगाई 15% से अधिक बढ़ गई है। खरगे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरते रुपये और विदेशी निवेशकों के भारत से दूरी बनाने पर भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने युवाओं की बढ़ती बेरोजगारी को देश के लिए एक बड़ा संकट बताया।

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RBI गवर्नर की चेतावनी: ईंधन की कीमतों में वृद्धि से खतरा

आर्थिक मोर्चे पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों ने भी स्थिति को लेकर आगाह किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) को महंगाई के बदलते ट्रेंड पर पैनी नजर रखनी होगी। उन्होंने विशेष रूप से मई महीने में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हुए बदलावों का जिक्र किया। गवर्नर का मानना है कि ईंधन की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आने वाले महीनों में परिवहन और अन्य सेवाओं के जरिए महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती है। यह स्थिति सरकार के लिए आगामी समय में चुनौती पेश कर सकती है।

वैश्विक तनाव और तेल सप्लाई में रुकावटों का असर

देश के भीतर बढ़ती कीमतों के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों पर नाकेबंदी और तेल की आपूर्ति में आई रुकावट ने वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। इस वैश्विक तनाव के बीच भारत सरकार ने एक महीने के भीतर तीन बार पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ा है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही यह वृद्धि देश की समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के सरकार के प्रयासों में बड़ी बाधा पैदा कर रही है।

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आर्थिक सुधारों की दिशा में सरकार के समक्ष बड़ी चुनौतियां

कुल मिलाकर, देश इस समय एक कठिन आर्थिक मोड़ पर है, जहां एक तरफ आम जनता महंगाई से त्रस्त है, तो दूसरी ओर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। विपक्ष लगातार सरकार से जवाबदेही और सुधारों की मांग कर रहा है। आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़ों पर नियंत्रण पाना और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों के असर को कम करना सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। जनता की टूटती उम्मीदें और युवाओं का बढ़ता गुस्सा सरकार के लिए राजनीतिक और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।

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Chandan Das

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