Maratha Reservation: मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने मंगलवार को अपनी पांच दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त कर दी। उन्होंने कहा, “हम जीत गए हैं, सरकार ने हमारी सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं।” जरांगे ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार आरक्षण संबंधी आदेश (जीआर) जारी कर देती है तो वे आज रात 9 बजे तक मुंबई छोड़ देंगे।

इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जरांगे को राहत देते हुए उन्हें 3 सितंबर की सुबह तक आजाद मैदान में रुकने की अनुमति दी है। इससे पहले कोर्ट ने मंगलवार दोपहर 3 बजे तक मैदान खाली करने के आदेश दिए थे। अदालत ने राज्य सरकार को भी फटकार लगाई कि उसके आदेशों को सही ढंग से लागू क्यों नहीं किया गया और जबरन मैदान खाली कराने की पहल क्यों नहीं की गई।

सरकार के साथ बनी सहमति
मंगलवार दोपहर को राज्य सरकार की समिति ने आजाद मैदान पहुंचकर मनोज जरांगे से मुलाकात की। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, शिवेंद्रसिंह भोसले, उदय सामंत और माणिकराव कोकाटे ने आंदोलन से संबंधित मसौदे पर चर्चा की और समाधान का रास्ता निकाला।
पाटिल ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को एक सप्ताह के भीतर शैक्षणिक योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी और मुआवजा दिया जाएगा। अब तक 15 करोड़ रुपए की सहायता दी जा चुकी है और शेष राशि जल्द वितरित की जाएगी।
अदालत की सख्ती और जरांगे के वकील की अपील
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस आरती साठे की पीठ ने आंदोलन स्थल खाली करने के आदेश के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यदि बुधवार तक स्थिति नहीं सुधरी, तो वह कड़ा आदेश पारित करेगी और किसी भी हद तक जा सकती है।
जरांगे के वकील ने अदालत से बुधवार दोपहर 11 बजे तक का समय मांगा, यह कहते हुए कि आंदोलन शांतिपूर्ण है और कानून व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है। अदालत ने यह दलील मान ली और सुनवाई बुधवार तक स्थगित कर दी।
आंदोलन के भविष्य पर नजर
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या राज्य सरकार समय पर आवश्यक आदेश जारी करती है और क्या मनोज जरांगे आंदोलन खत्म कर मुंबई छोड़ते हैं। अगर सरकार वादे निभाती है, तो यह मराठा आरक्षण आंदोलन की बड़ी जीत मानी जाएगी।
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