NH-343 Road Condition: छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-343) की हालत इन दिनों बद से बदतर होती जा रही है। अंबिकापुर से रामानुजगंज को जोड़ने वाला यह अहम मार्ग ग्राम असोला के पास पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो चुका है। लगातार बारिश ने स्थिति को और भयावह बना दिया है, जिससे यात्री भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

घंटों लगा रहता है जाम, जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे लोग
मंगलवार सुबह से ही असोला के पास गड्ढों और कीचड़ से भरी सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। छोटे वाहन तो जैसे-तैसे निकल जाते हैं, लेकिन भारी वाहनों के फंसने से पूरा ट्रैफिक घंटों ठप हो जाता है। इस दौरान आम यात्रियों को धूप, धूल और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इन गड्ढों की वजह से वाहन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और सड़क हादसों की संभावना बनी रहती है। सबसे बड़ी समस्या तब खड़ी होती है जब एम्बुलेंस जैसे जरूरी वाहन समय पर नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है।
वर्षों से हो रही है मांग, प्रशासन और नेताओं ने नहीं दिया ध्यान
ग्राम असोला और आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण की मांग पिछले कई वर्षों से उठाई जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। चुनावों के दौरान नेताओं की जुबान पर “विकास” और “सड़क निर्माण” जैसे वादे जरूर रहते हैं, लेकिन वास्तविक काम कहीं नजर नहीं आता।
स्थानीय व्यापारी और किसान भी इस जर्जर मार्ग से परेशान हैं। उनका कहना है कि खराब सड़कों की वजह से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और फसलों की ढुलाई में भी परेशानी आ रही है। राहगीरों का कहना है कि सड़क भले न बने कम से कम गड्ढों को पाटकर त्वरित राहत तो दी जा सकती है पर उसके लिए भी कोई पहल नहीं किया जा रहा है।
आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम है NH-343
यह मार्ग सरगुजा क्षेत्र के खनिज संसाधनों जैसे कोयला, लोहा और बॉक्साइट के परिवहन के लिए बेहद जरूरी है। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से यह सड़क अब जानलेवा बन चुकी है। गंभीर सवाल यह भी है कि जब इस मार्ग से राज्य को करोड़ों की कमाई होती है, तो फिर जनता को बुनियादी सुविधा क्यों नहीं मिल रही?
क्या केवल पोस्टर और भाषणों तक सीमित है विकास?
असोला मार्ग की मौजूदा स्थिति राजनीतिक वादों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करती है। विकास के नाम पर जो बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वह असल में गड्ढों में धंसते नजर आ रहे हैं।
प्रशासन और नेताओं की उदासीनता के खिलाफ अब जनआक्रोश बढ़ रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या विकास केवल भाषणों, शिलान्यास और सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित रहेगा? NH-343 की जर्जर हालत आज केवल एक सड़क की समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता का प्रतीक बन गई है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह केवल आवागमन की नहीं, बल्कि राजनीतिक साख और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन जाएगी।
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