Media Samvad 2026 : नई दिल्ली में समाचार4मीडिया द्वारा आयोजित ‘मीडिया संवाद 2026’ कार्यक्रम में देश के कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने भारतीय टीवी मीडिया की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और बदलते दर्शक व्यवहार पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान NDTV इंडिया के मैनेजिंग एडिटर रोहित विश्वकर्मा ने टीवी मीडिया की दिशा, डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव और दर्शकों की बदलती पसंद पर बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों को अब खुद को केवल टीवी चैनल नहीं, बल्कि न्यूज़ बिजनेस का हिस्सा मानकर रणनीति बनानी होगी।

टीवी दर्शकों के बदलते आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
अपने संबोधन में रोहित विश्वकर्मा ने दर्शकों से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान समय में टीवी समाचार देखने वालों का सबसे बड़ा वर्ग 61 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का है, जिसकी हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है। वहीं 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के दर्शक लगभग 18 प्रतिशत हैं। यानी कुल मिलाकर टीवी न्यूज़ का करीब 40 प्रतिशत दर्शक वर्ग वरिष्ठ नागरिकों का है। उन्होंने कहा कि यह संकेत देता है कि युवा पीढ़ी तेजी से टीवी से दूरी बना रही है और मीडिया संस्थानों को इस बदलाव को गंभीरता से समझना होगा।

Gen-Z की प्राथमिकता अब डिजिटल प्लेटफॉर्म
रोहित विश्वकर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर टीवी न्यूज़ की चर्चा करने वाला या उसकी आलोचना करने वाला युवा वर्ग वास्तव में टीवी स्क्रीन पर समाचार बहुत कम देखता है। उनके अनुसार Gen-Z की टीवी न्यूज़ में हिस्सेदारी केवल 11 से 12 प्रतिशत के आसपास है। यदि 30 वर्ष तक के सभी युवाओं को भी जोड़ लिया जाए, तब भी यह आंकड़ा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और सोशल मीडिया आधारित कंटेंट को अधिक प्राथमिकता दे रही है, इसलिए मीडिया संस्थानों को अपनी रणनीति उसी दिशा में विकसित करनी होगी।
2029 के चुनाव से पहले रणनीति बदलना जरूरी
उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 तक देश के लगभग 34 से 35 प्रतिशत मतदाता और दर्शक वर्ग Gen-Z और मिलेनियल्स का होगा। ऐसे में यदि मीडिया संस्थान आज से ही इस वर्ग की जरूरतों और पसंद को ध्यान में रखकर कंटेंट तैयार नहीं करेंगे तो भविष्य में उनकी प्रासंगिकता और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में वही संस्थान आगे रहेंगे जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मजबूत उपस्थिति बनाएंगे और नई पीढ़ी की अपेक्षाओं के अनुसार खुद को ढालेंगे।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ रहा विज्ञापन निवेश
विज्ञापन बाजार का उल्लेख करते हुए रोहित विश्वकर्मा ने कहा कि आज कुल विज्ञापन खर्च का लगभग 65 से 67 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जा रहा है। इसके मुकाबले टीवी को करीब 18 प्रतिशत और प्रिंट मीडिया को लगभग 12 प्रतिशत विज्ञापन मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव साफ संकेत देता है कि विज्ञापनदाता भी अब वहीं निवेश कर रहे हैं, जहां उन्हें अधिक सक्रिय और बड़ा डिजिटल दर्शक वर्ग दिखाई देता है।
स्क्रीन बदल सकती है, लेकिन पत्रकारिता की ताकत नहीं
अपने विचार रखते हुए उन्होंने एक विदेशी समाचार पत्र की केस स्टडी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस संस्थान ने समय रहते समझ लिया कि वह केवल अखबार छापने का व्यवसाय नहीं करता, बल्कि न्यूज़ के कारोबार में है। इसी तरह टीवी चैनलों को भी यह स्वीकार करना होगा कि स्क्रीन का आकार मोबाइल, टैबलेट या टीवी कुछ भी हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता की मूल ताकत विश्वसनीय खबरें और व्यापक रिपोर्टिंग नेटवर्क ही है। उन्होंने कहा कि किसी आपदा, बाढ़ या बड़े घटनाक्रम के दौरान एक संगठित मीडिया संस्थान ही बड़ी संख्या में रिपोर्टरों के माध्यम से व्यापक कवरेज दे सकता है।
पत्रकारों पर हमलों को बताया अस्वीकार्य
हाल के दिनों में पत्रकारों पर हुए हमलों और सोशल मीडिया ट्रोलिंग का जिक्र करते हुए रोहित विश्वकर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना, असहमति और सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। हालांकि किसी भी पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की, हिंसा या डराने-धमकाने जैसी घटनाएं पूरी तरह गलत और असंवैधानिक हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता लोकतंत्र की मजबूती का आधार है और इसकी रक्षा सभी की जिम्मेदारी है।
निष्पक्ष पत्रकारिता ही NDTV की प्राथमिकता
रोहित विश्वकर्मा ने कहा कि NDTV का मूल सिद्धांत निष्पक्ष पत्रकारिता है। उनका कहना था कि किसी सरकार या विपक्ष का पक्ष लेना मीडिया का काम नहीं है। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल तथ्यों पर आधारित खबरों को निष्पक्ष तरीके से जनता तक पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता ही किसी भी मीडिया संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी है।
भविष्य के लिए बदलाव ही सफलता की कुंजी
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने रोहित विश्वकर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। पूरे संवाद का निष्कर्ष यही रहा कि भारतीय टीवी मीडिया अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां केवल पारंपरिक टीआरपी के भरोसे आगे बढ़ना संभव नहीं है। बदलती तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती ताकत और युवा दर्शकों की बदलती आदतों को समझते हुए मीडिया संस्थानों को समय के साथ खुद को बदलना होगा। तभी वे भविष्य में अपनी विश्वसनीयता और प्रासंगिकता दोनों बनाए रख सकेंगे।
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