Public Impeachment : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार, 31 अक्टूबर को दिल्ली में एक अनोखा राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुए इस आयोजन को ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ यानी सार्वजनिक महाभियोग का नाम दिया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसकी अध्यक्षता की, जबकि राहुल गांधी ने कार्यक्रम के अंत में अपना संबोधन दिया। हालांकि, यह पूरी कार्यवाही प्रतीकात्मक थी और इसका संवैधानिक प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से कोई संबंध नहीं था।

मीरा कुमार ने संभाली अध्यक्षता, नेहरू की कुर्सी बनी चर्चा का विषय
इस कार्यक्रम के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तस्वीर साझा करते हुए कुर्सी के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र किया। उनके मुताबिक, जिस कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, उसका संबंध देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से रहा है। खेड़ा ने दावा किया कि नेहरू अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान इसी कुर्सी पर बैठा करते थे।

पवन खेड़ा ने अपने संदेश में इस कुर्सी को देश के इतिहास और नेहरू की राजनीतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि इसने कई महत्वपूर्ण फैसलों को करीब से देखा है। उन्होंने यह भी लिखा कि इसी कुर्सी पर बैठकर मीरा कुमार ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्यवाही की। उनके पोस्ट में यह राजनीतिक संदेश भी दिया गया कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज से संतुष्ट नहीं है।
राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना
कार्यक्रम के समापन पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने मीरा कुमार की अध्यक्षता और नेहरू की विरासत से जुड़ी कुर्सी का उल्लेख करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष के आरोपों को दोहराया। राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।
इस आयोजन में कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विभिन्न विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया।

खड़गे ने रखे छह आरोप, 13.2 करोड़ मतदाताओं का मुद्दा उठाया
कार्यवाही के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप प्रस्तुत किए। विपक्ष का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान देशभर में लगभग 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। गठबंधन ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किए गए। इसके अलावा ECINET के माध्यम से मतदाता सूची पर नियंत्रण स्थापित करने और चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों को महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप भी लगाया गया।
INDIA गठबंधन ने यह भी दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहे हैं। हालांकि, ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
संसद में भी उठ चुका है हटाने का मामला
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष पहले भी संसद में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर चुका है। 12 मार्च 2026 को राज्यसभा के 63 सदस्यों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। हालांकि, 6 अप्रैल 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति ने संबंधित नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था।
प्रतीकात्मक कार्यवाही से आगे क्या?
शनिवार का सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम विपक्ष के चुनाव आयोग के खिलाफ जारी राजनीतिक विरोध का हिस्सा रहा। इसका उद्देश्य मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सार्वजनिक मंच पर उठाना था। यह स्पष्ट है कि इस तरह की प्रतीकात्मक कार्यवाही से किसी संवैधानिक पदाधिकारी को स्वतः पद से नहीं हटाया जा सकता। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संविधान में निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
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