Nail biting side effects
Nail biting side effects:अक्सर तनाव, घबराहट या बोरियत के कारण लोग अनजाने में अपने दांतों से नाखून चबाने लगते हैं। पहली नज़र में यह एक साधारण सी आदत लग सकती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत शरीर को गंभीर बीमारियों का घर बना सकती है। नाखून हमारे शरीर की स्वच्छता (Hygiene) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और इन्हें चबाना न केवल आपके हाथों की सुंदरता बिगाड़ता है, बल्कि आपके आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुँचाता है।
नाखूनों के निचले हिस्से में धूल, मिट्टी और अनगिनत सूक्ष्म कीटाणु जमा होते हैं, जिन्हें सामान्य रूप से हाथ धोने से भी पूरी तरह साफ नहीं किया जा सकता। जब कोई व्यक्ति दांतों से नाखून काटता है, तो ये बैक्टीरिया लार के साथ मिलकर सीधे पेट में पहुँच जाते हैं। इससे शरीर के भीतर संक्रमण का चक्र शुरू हो जाता है, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को धीरे-धीरे कमजोर करने लगता है।
प्रकाश अस्पताल की जनरल फिजिशियन डॉ. रिनशी अग्रवाल बताती हैं कि नाखून चबाने का सबसे पहला और सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। नाखूनों के जरिए शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया पेट दर्द, दस्त (Diarrhea), उल्टी और गैस जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक यह आदत बनी रहने से पेट में कीड़े (Intestinal Worms) होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, जिससे पोषण की कमी हो सकती है।
नाखून चबाने की क्रिया का बुरा असर हमारे ओरल हेल्थ पर भी पड़ता है। डॉ. अग्रवाल के अनुसार, बार-बार नाखून काटने से दांतों के इनेमल को नुकसान पहुँचता है, जिससे दांत कमजोर होकर टूटने लगते हैं। इसके अलावा, मुंह में छाले, सांसों की बदबू और मसूड़ों में गंभीर संक्रमण या सूजन होना एक सामान्य समस्या बन जाती है। बच्चों में यह आदत उनके दांतों की बनावट को भी बिगाड़ सकती है।
केवल शरीर के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी यह आदत नुकसानदेह है। नाखून चबाने से उनके आसपास की त्वचा छिल जाती है, जिसे ‘पैरोनिशिया’ कहा जाता है। इस कारण नाखूनों के कोनों में लालपन, सूजन और दर्दनाक पस बनने की समस्या हो सकती है। कई बार यह संक्रमण इतना गहरा हो जाता है कि इसके लिए छोटी सर्जरी या एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता पड़ती है।
डॉ. रिनशी अग्रवाल ने एक बेहद डराने वाली संभावना की ओर भी इशारा किया है। वे कहती हैं कि बहुत ही दुर्लभ मामलों में, यदि उंगली का संक्रमण गंभीर हो जाए और बैक्टीरिया खून के प्रवाह (Bloodstream) में मिल जाएं, तो यह ‘सेप्सिस’ जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। सेप्सिस एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं। इसलिए इस आदत को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत अक्सर मानसिक स्थिति जैसे तनाव या चिंता से जुड़ी होती है। इसे सुधारने के लिए जागरूकता और काउंसलिंग की मदद ली जा सकती है। नाखूनों को हमेशा छोटा रखना, कड़वे स्वाद वाली नेल पॉलिश का उपयोग करना या तनाव के समय च्युइंग गम का सहारा लेना इस आदत को बदलने में सहायक हो सकता है। सही समय पर सतर्कता बरतकर आप कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।
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