Nandigram Election : पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल मिलन प्रधान के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पहले मतदान शांतिपूर्ण तरीके से होने दिया जाए। चीफ जस्टिस ने कहा, “उन्हें लड़ने दें, वोटिंग शांतिपूर्ण होने दें।”
6 अक्टूबर को होना है नंदीग्राम में उपचुनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव मंगलवार, 6 अक्टूबर को होना है। इसी के चलते राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले पर तत्काल सुनवाई करने और उसी दिन कोई निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार की इस मांग को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने संकेत दिया कि मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
वोटिंग के बाद हो सकती है अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किसी भी प्रकार की दखलंदाजी से परहेज किया। अदालत का रुख था कि चुनावी प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए और मतदाताओं को शांतिपूर्ण माहौल में मतदान का अवसर मिलना चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई मतदान के बाद होने की संभावना है। यानी फिलहाल मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने से रोकने वाला कोई आदेश नहीं दिया गया है।
जस्टिस जयमाल्या बागची ने खुद को किया अलग
सुनवाई के दौरान जस्टिस जयमाल्या बागची ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने अदालत को बताया कि विवादित मामला वर्ष 2007 की घटना से संबंधित है और उस समय वह इस केस में वकील रह चुके थे। इसी वजह से उन्होंने मामले की सुनवाई से अलग रहने का फैसला किया। इसके बाद मामले में आगे की कार्यवाही चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के समक्ष हुई।
2007 की FIR पर सुप्रीम कोर्ट में बहस
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से दलील पेश की। उन्होंने कहा कि मामले पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। मेहता ने अदालत को बताया कि इस केस में कई साल पहले गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। राज्य सरकार का तर्क था कि गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं होने के कारण मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मनुसिंघवी ने चुनाव का दिया हवाला
मिलन प्रधान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनुसिंघवी ने दलील देते हुए कहा कि अगले दिन चुनाव है और उनके मुवक्किल को 21 दिनों की अंतरिम जमानत मिली हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले वर्ष 2007 की FIR को लेकर कार्रवाई क्यों की जा रही है। मनुसिंघवी ने कहा कि मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत मिलने के बावजूद परेशान किया जा रहा है।
हत्या और बम धमाके के आरोप का जिक्र
राज्य सरकार की ओर से तुषार मेहता ने आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिलन प्रधान पर हत्या का आरोप है और मामला बम धमाके की घटना से भी जुड़ा हुआ है। मेहता ने अदालत में कहा कि वह मामले में मिलन प्रधान की कथित भूमिका साबित करेंगे। इसके बाद बचाव पक्ष ने तत्काल सुनवाई की मांग दोहराई, लेकिन अदालत ने मतदान तक हस्तक्षेप नहीं किया।
पुलिस कार्रवाई पर चीफ जस्टिस ने उठाए सवाल
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर मिलन प्रधान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी था, तो पुलिस ने करीब 19 वर्षों तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने इतने लंबे समय तक वारंट के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की।
हाई कोर्ट से मिली थी अंतरिम जमानत
मिलन प्रधान को 2007 के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला पहुंचा। जस्टिस तीर्थंकर घोष की पीठ ने उन्हें 20 अक्टूबर तक सभी मामलों में अंतरिम जमानत दी थी। अदालत ने शर्त रखी थी कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद मिलन प्रधान को हल्दिया कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। राज्य सरकार ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र की जीत
सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत रद्द कराने की राज्य सरकार की कोशिश अदालत में सफल नहीं हुई। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले मिलन प्रधान को बिना बाधा चुनाव लड़ने का अवसर दिया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और नंदीग्राम के लोगों की जीत बताया।
परिवार ने पुराने मामलों में गिरफ्तारी का लगाया आरोप
इस बीच मिलन प्रधान के परिवार ने आरोप लगाया है कि चुनाव के लिए उनका नाम उम्मीदवार के तौर पर घोषित होने के बाद उन्हें पुराने मामलों में गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस भी इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाती रही है। वहीं राज्य सरकार गंभीर आपराधिक आरोपों और पुराने गैर-जमानती वारंट का हवाला दे रही है। अब सभी की नजर 6 अक्टूबर के मतदान और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है।
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