Narayanpur Development
Narayanpur Development: छत्तीसगढ़ के इतिहास में 31 मार्च की तारीख एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जब राज्य को आधिकारिक तौर पर सशस्त्र माओवादियों से पूरी तरह मुक्त घोषित किया गया। दशकों तक हिंसा और भय के साये में जीने वाले बस्तर संभाग में अब शांति की बयार बह रही है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले का सुदूरवर्ती गांव ‘नेलांगुर’, जो कभी माओवादियों का गढ़ और “अति संवेदनशील” क्षेत्र माना जाता था, अब एक बड़ी उपलब्धि का गवाह बना है। यहां के निवासियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करना था, लेकिन अब सुरक्षा और विकास के समन्वय ने गांव की तस्वीर बदल दी है।
अधिकारियों ने रविवार को एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि नेलांगुर गांव के हर घर में पहली बार नल से जल का कनेक्शन पहुंच गया है। यह केवल एक पाइपलाइन बिछाने का कार्य नहीं है, बल्कि उस संघर्ष का अंत है जो यहां की महिलाएं और ग्रामीण वर्षों से स्वच्छ पेयजल के लिए कर रहे थे। एक समय था जब इस गांव के लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते थे और सुरक्षा कारणों से जल स्रोतों तक जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा था। अब यह परियोजना पूरी तरह चालू हो गई है, जिससे गांव के सामाजिक और स्वास्थ्य स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।
नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 52 किलोमीटर दूर स्थित नेलांगुर गांव महाराष्ट्र की सीमा के करीब दुर्गम ओरछा ब्लॉक में बसा है। नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण इस क्षेत्र में बुनियादी सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए एक हिमालयी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि यह सफलता राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की मुख्यधारा को पहुंचाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। जल जीवन मिशन के तहत यहां एक आधुनिक और टिकाऊ जल आपूर्ति प्रणाली स्थापित की गई है।
गांव की इस जल परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आत्मनिर्भरता है। कलेक्टर नम्रता जैन ने स्पष्ट किया कि जल स्रोत से पानी निकालने के लिए सौर ऊर्जा से संचालित पंपों का उपयोग किया जा रहा है। पाइपलाइन के माध्यम से पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है। सौर ऊर्जा का विकल्प इसलिए चुना गया ताकि बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम हो और ग्रामीणों को बिना किसी बाधा के निरंतर पानी मिलता रहे। इस तकनीक ने बिजली की समस्या वाले क्षेत्रों के लिए एक रोल मॉडल पेश किया है।
नेलांगुर में विकास की यह गति पिछले साल अप्रैल में तब तेज हुई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और राज्य पुलिस ने मिलकर यहां एक सुरक्षा शिविर स्थापित किया। सुरक्षा बलों के सघन अभियानों ने नक्सलियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, जिससे प्रशासन को विकास कार्य करने का सुरक्षित वातावरण मिला। 31 मार्च को नक्सलवाद मुक्त घोषित होने के बाद, अब सरकार का पूरा ध्यान घने जंगलों के बीच बसे इन गांवों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने पर है, ताकि दोबारा अशांति की स्थिति पैदा न हो।
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