NEET 2026 Paper Leak : चिकित्सा शिक्षा के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा NEET 2026 के पेपर लीक मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। केंद्र सरकार ने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता और इसके अंतरराज्यीय कनेक्शन को देखते हुए जांच की कमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। CBI अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी को औपचारिक आदेश प्राप्त हो चुका है और जल्द ही इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर तफ्तीश शुरू की जाएगी। इसके लिए सीबीआई की एक हाई-टेक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है, जो पेपर लीक के इस विशाल नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेगी।
प्रारंभिक जांच में जो चौंकाने वाली कड़ियां सामने आई हैं, उनके मुताबिक इस पूरी साजिश की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक से हुई थी। सूत्रों का दावा है कि नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस में ही पेपर की कॉपी की गई। वहां से यह पेपर डिजिटल और फिजिकल माध्यम से हरियाणा के गुरुग्राम पहुंचा, जहां एक डॉक्टर के पास इसकी पहली खेप पहुंची। गुरुग्राम से यह जयपुर और फिर राजस्थान के जमवा रामगढ़ तक पहुंच गया। जांच एजेंसियां अब उन रास्तों और लोगों की पहचान कर रही हैं जिन्होंने इस गोपनीय दस्तावेज को एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचाने में मदद की।
पेपर लीक का यह नेटवर्क किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था। राजस्थान एसओजी (SOG) की जांच के अनुसार, जमवा रामगढ़ से यह पेपर राजस्थान के ही सीकर पहुंचा, जो कोचिंग हब माना जाता है। सीकर को केंद्र बनाकर इस पेपर को देश के सुदूर इलाकों जैसे जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल तक सर्कुलेट किया गया। इस मामले में नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े एक संदिग्ध को हिरासत में भी लिया गया है। सीबीआई जल्द ही एसओजी से सभी दस्तावेज, केस फाइल और साक्ष्य अपने कब्जे में ले लेगी ताकि मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।
राजस्थान एसओजी की अब तक की जांच में यह डरावना सच सामने आया है कि जिसे ‘गेस पेपर’ बताकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया था, उसके करीब 60 सवाल असली नीट परीक्षा में जस के तस पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, सवालों की भाषा, लाइन, शब्दों का चयन और यहां तक कि पंक्चुएशन मार्क (कॉमा और फुल-स्टॉप) में भी कोई अंतर नहीं था। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि परीक्षा से काफी पहले ही पेपर लीक माफियाओं की पहुंच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के गोपनीय डेटा तक हो चुकी थी।
जांच के दौरान एजेंसियों के हाथ ‘Private Mafia’ नाम का एक डिजिटल सुराग लगा है। यह एक व्हाट्सऐप ग्रुप था जिसमें करीब 400 सदस्य जुड़े हुए थे। इस ग्रुप का उद्देश्य केवल और केवल लीक किए गए पेपरों को अपलोड करना था। ग्रुप के डिस्क्रिप्शन में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि कोई भी सदस्य पेपर को बाहर फॉरवर्ड नहीं करेगा। एसओजी का दावा है कि उन्होंने इस ग्रुप के एडमिन और सक्रिय सदस्यों की पहचान कर ली है। अब सीबीआई एनटीए के रिकॉर्ड के साथ इन डिजिटल सबूतों का मिलान कर रही है।
इस पूरे खेल के पीछे दो बड़े किरदारों के नाम प्रमुखता से उभर रहे हैं। मनीष यादव को इस पेपर लीक का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है, जिसे जयपुर से हिरासत में लिया गया है। वहीं, राकेश मंडावरिया पर पेपर को विभिन्न सेंटरों और राज्यों में डिस्ट्रीब्यूट करने का गंभीर आरोप है। जांच में पता चला है कि सबसे पहले बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल लीक किए गए थे। परीक्षा में बायोलॉजी के सभी 90 सवाल वही थे जो माफियाओं ने वायरल किए थे। अब पूरे देश के छात्रों और अभिभावकों की निगाहें सीबीआई पर टिकी हैं।
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