Nepal Flood 2026 : नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े स्तर पर तबाही मचा दी है। सोमवार तक इस आपदा में 939 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,925 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। हालांकि, लगातार बारिश, उफनती नदियों और टूटे सड़क-पुलों के कारण कई इलाकों तक पहुंचना अभी भी मुश्किल बना हुआ है।
26 अगस्त की बाढ़ ने गांवों और कस्बों को उजाड़ा
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के टूटने के बाद 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया। भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से घर, वाहन, सड़कें और पुल पानी के तेज बहाव में बह गए। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिला है।
चीन के सीमावर्ती इलाकों में भी नुकसान
चीनी क्षेत्र में भी बाढ़ और संबंधित घटनाओं से 16 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। चीनी मीडिया के अनुसार, तिब्बत में करीब 550 लोग अब भी लापता हैं। इससे स्पष्ट है कि आपदा का प्रभाव नेपाल की सीमा तक सीमित नहीं रहा और हिमालयी क्षेत्र के दोनों ओर बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।
जलविद्युत सुरंगों में फंसे श्रमिकों की तलाश
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं पर काम करने वाले 639 श्रमिकों और कर्मचारियों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बचाव एजेंसियों को आशंका है कि इनमें से कई लोग सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं। एक बंद सुरंग तक पहुंचने में मुश्किल आने के बाद रास्ता खोलने के लिए नियंत्रित विस्फोट तक करना पड़ा। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाली अधिकारियों के साथ बचाव अभियान में सहयोग कर रही हैं।
नेपाल ने मांगी अंतरराष्ट्रीय मदद
सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने और मृतकों की फोरेंसिक पहचान के लिए नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री के अनुसार, अमेरिका से फ्रीजर, डीएनए जांच किट और लाइडार समेत जरूरी गैर-खाद्य सामग्री मांगी गई है। सिंगापुर से शवों की पहचान में इस्तेमाल होने वाली सामग्री तथा चीन और सिंगापुर से बेल्ली पुल और अधिक क्षमता वाले ड्रोन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
शवों की पहचान बनी राहत अभियान की बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद अब मृतकों की पहचान करना अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। चितवन में 279, नवलपरासी पूर्व में 216, नवलपरासी पश्चिम में 168, नुवाकोट में 95, गोरखा में 65, धादिंग में 55, तनहूं में 38 और रसुवा में 23 शव बरामद किए गए हैं। अस्पतालों में लापता परिजनों की तलाश कर रहे लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।
लंबे समय तक पानी में रहने से पहचान मुश्किल
कई शव लंबे समय तक बाढ़ के पानी में रहने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके चलते उनकी पहचान करना बेहद कठिन हो रहा है। अस्पतालों और अन्य स्थानों पर बरामद शवों तथा लापता लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं, ताकि परिजन अपने रिश्तेदारों को पहचान सकें। अधिकारियों के अनुसार, सैकड़ों शवों में से अभी केवल कुछ दर्जन की ही पहचान हो पाई है।
लापता लोगों में 590 विदेशी नागरिक
नेपाल में लापता 3,925 लोगों में कम से कम 590 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो 39 देशों से संबंधित बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 83 सुरक्षाकर्मी भी हैं। भारत के भी कई नागरिकों के लापता होने की सूचना है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, 275 से अधिक भारतीय और भारतीय मूल के 128 लोग अब तक संपर्क से बाहर हैं।
कई देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया
सोमवार तक बचाए गए 10,451 लोगों में भारत के अलावा अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, बेल्जियम, जर्मनी, इटली, माल्टा, तुर्किये, स्विट्जरलैंड और पुर्तगाल के नागरिक भी शामिल हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में बचाए गए 149 लोगों की सूची भी साझा की थी।
21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत में जुटे
नेपाल सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत, खोज और बचाव अभियान के लिए 21,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ान भर रहे हैं। बाढ़ में 19 सड़क पुलों के अलावा कई राजमार्ग और प्रमुख सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं।
रसुवागढ़ी मार्ग समेत कई रास्ते प्रभावित
बाढ़ से नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण जमीनी व्यापार मार्ग रसुवागढ़ी सीमा मार्ग भी प्रभावित हुआ है। वहीं, गोरखा जिले में भूस्खलन के कारण बूढ़ी गंडकी नदी का बहाव कुछ समय के लिए बाधित हुआ था। बाद में नदी का प्रवाह फिर शुरू हो गया। रसुवा से बचाए गए घायल लोगों का काठमांडू में इलाज जारी है।
सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों ने बढ़ाई परेशानी
राहत अभियान के बीच नेपाल सरकार को सोशल मीडिया पर फैल रही गलत सूचनाओं से भी जूझना पड़ रहा है। बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में फर्जी और एआई से तैयार वीडियो व तस्वीरें प्रसारित की गईं। सरकार ने 72 उपयोगकर्ताओं को अनुचित सामग्री हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा नेपाल प्रेस काउंसिल ने भोटेकोशी घटना से जुड़ी गलत सूचनाओं और आपत्तिजनक सामग्री की शिकायत के लिए विशेष पोर्टल भी शुरू किया है।
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