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North Korea Escape: मौत के साये से आज़ादी तक! नॉर्थ कोरिया से भागे परिवार की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी!

North Korea Escape:  दुनिया के नक्शे पर उत्तर कोरिया (North Korea) एक ऐसा देश है, जिसकी सीमाएं अभेद्य मानी जाती हैं। तानाशाह किम जोंग उन के शासन में यहां की दीवारें भी ‘बोलती’ हैं और सुरक्षा ऐसी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन, 9 लोगों के एक परिवार ने इस खौफनाक पहरे को धता बताते हुए मौत के मुंह से निकलने का फैसला किया। यह महज एक पलायन नहीं था, बल्कि किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से भी ज्यादा खतरनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला मिशन था। इस परिवार ने साबित कर दिया कि आजादी की भूख, मौत के डर से कहीं अधिक बड़ी होती है।

दशक भर की लंबी तैयारी: मछुआरे बनकर जीता पहरेदारों का भरोसा

इस ‘ग्रेट एस्केप’ की स्क्रिप्ट कोई एक-दो दिन में नहीं लिखी गई थी। इसकी नींव किम इल ह्योक और उनके भाई ने करीब 10 साल पहले ही रख दी थी। उनके पिता का सपना था कि उनका परिवार एक स्वतंत्र देश में सांस ले। पिता के इसी सपने को पूरा करने के लिए दोनों भाइयों ने सालों तक मछुआरे के रूप में काम किया। उन्होंने जानबूझकर तटीय गार्ड्स (Coastal Guards) से दोस्ती की और उनका भरोसा जीता, ताकि वे धीरे-धीरे सीमा के करीब जा सकें और किसी को उन पर शक न हो। सालों तक उन्होंने अपनी भावनाओं को दबाए रखा और सही वक्त का इंतजार किया।

6 मई की वो तूफानी रात: जब लहरों ने दिया आजादी का साथ

आजादी के इस सफर का सबसे निर्णायक मोड़ 6 मई 2023 की रात को आया। उस रात समुद्र में भयंकर तूफान था और लहरें उफान पर थीं। आमतौर पर ऐसी स्थिति में कोस्टल गार्ड्स की पेट्रोलिंग सुस्त हो जाती है और दृश्यता कम हो जाती है। किम के परिवार ने इसी को अपने मौके के तौर पर देखा। जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब यह परिवार एक छोटी सी नाव पर सवार होकर समंदर की लहरों से टकराने निकल पड़ा। उन्हें पता था कि अगर वे पकड़े गए, तो उनके लिए केवल मौत की सजा ही बची थी।

बोरियों में बंद मासूम और बारूदी सुरंगों का खौफनाक रास्ता

इस मिशन का सबसे दर्दनाक हिस्सा बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा था। परिवार में 4 और 6 साल के दो मासूम बच्चे भी थे। पेट्रोलिंग गार्ड्स के कानों तक बच्चों के रोने या बोलने की आवाज न पहुंचे, इसके लिए उन्हें अनाज की बोरियों में बंद कर दिया गया था। सोचिए, उन माता-पिता के दिल पर क्या गुजरी होगी जिन्होंने अपने जिगर के टुकड़ों को दमघोंटू बोरियों में सिर्फ इसलिए बंद किया ताकि उनकी जान बच सके। वहीं, घर की महिलाओं को उन रास्तों से गुजरना पड़ा जो बारूदी सुरंगों (Landmines) से भरे थे। एक भी गलत कदम और पूरा परिवार वहीं ढेर हो सकता था।

गर्भवती पत्नी का साहस और दक्षिण कोरिया की सीमा में प्रवेश

किम इल ह्योक की पत्नी उस समय 5 महीने की गर्भवती थी। एक गर्भवती महिला के लिए यह सफर किसी नर्क से गुजरने जैसा था, लेकिन उसने अपने आने वाले बच्चे को गुलामी और तानाशाही से बचाने के लिए इस खौफनाक जोखिम को चुना। जब उनकी नाव तमाम बाधाओं को पार कर दक्षिण कोरियाई जलक्षेत्र में पहुंची, तो वहां की नौसेना ने उनसे पूछा कि क्या उनकी नाव का इंजन खराब है? इस पर किम ने जो जवाब दिया उसने सबका दिल जीत लिया। उन्होंने कहा, “हम इंजन ठीक कराने नहीं, बल्कि आजादी की तलाश में आए हैं।”

आजादी तो मिली, लेकिन स्क्रिप्ट लिखने वाले नायक का दुखद अंत

दक्षिण कोरिया ने इस बहादुर परिवार का खुली बाहों से स्वागत किया और उन्हें शरण दी। लेकिन, इस रोमांचक कहानी का अंत बेहद गमगीन रहा। जिस छोटे भाई ने 10 साल तक इस पलायन की रूपरेखा तैयार की थी और अपने परिवार को आजाद कराया था, वह इस आजादी का आनंद ज्यादा दिन तक नहीं ले सका। दक्षिण कोरिया पहुंचने के महज 19 दिन बाद एक डाइविंग हादसे में उसकी मौत हो गई। परिवार आज आजाद तो है, लेकिन उनकी आंखों में उस वीर सदस्य के खोने का गम हमेशा बना रहेगा जिसने उनके लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी थी।

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