Operation Sindoor: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नौरीन नियाजी ने देश की सैन्य नीतियों और पिछले साल हुए घटनाक्रमों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अत्यंत सफल सैन्य अभियान करार दिया है। नौरीन का मानना है कि पाकिस्तान के भीतर वर्तमान में जो राजनीतिक और आर्थिक उथल-पुथल मची है, वह सीधे तौर पर इसी सैन्य ऑपरेशन की सफलता का परिणाम है। उनके अनुसार, भारतीय सेना की अचूक कार्रवाई ने न केवल पाकिस्तान के रक्षा तंत्र को झकझोर दिया, बल्कि देश के अंदरूनी सुरक्षा ढांचे को भी गहरा आघात पहुँचाया है।

जनरल असीम मुनीर की भूमिका और पदोन्नति
नौरीन नियाजी ने जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मई 2025 में भारत के साथ हुआ सैन्य टकराव पाकिस्तान सेना की छवि को सुधारने और सत्ता पर पकड़ मज़बूत करने के लिए रचा गया था। उल्लेखनीय है कि उस दौरान असीम मुनीर पाकिस्तान के आर्मी चीफ थे। बाद में उन्हें ‘फील्ड मार्शल’ के गौरवशाली पद पर पदोन्नत किया गया और नवनिर्मित ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ (CDF) की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे वे देश की तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर बन गए। नौरीन के दावे के मुताबिक, यह पूरी कवायद मुनीर की व्यक्तिगत शक्ति को और अधिक विस्तार देने के लिए की गई थी।

भारत का संयम और कूटनीतिक समझ
एक साक्षात्कार के दौरान नौरीन ने भारत के सैन्य रुख पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत ने जानबूझकर पूर्ण पैमाने पर तबाही नहीं मचाई। उन्होंने तर्क दिया कि जब 10 मई को पाकिस्तान ने हमला किया, तब भारत के पास जवाबी कार्रवाई करने की पूरी क्षमता थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि किसी ‘आपसी समझ’ के चलते भारत ने बहुत कड़ा रुख नहीं अपनाया। नौरीन ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत ने इज़रायल के दबाव में आकर टकराव नहीं बढ़ाया था, जैसा कि कुछ लोग तर्क देते हैं, बल्कि यह भारत की एक सोची-समझी कूटनीतिक रणनीति थी।
डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता और बचाव का दावा
नौरीन ने यह दावा भी किया कि उस कठिन समय में पाकिस्तान की बची-खुची प्रतिष्ठा को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यक्तिगत हस्तक्षेप ने बचाया। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका, इज़रायल और पाकिस्तान के बीच पर्दे के पीछे से संबंध सामान्य करने की कोशिशें चल रही थीं, और ट्रंप का मुनीर की प्रशंसा करना इसी दिशा में एक कदम था। उनके अनुसार, यदि ट्रंप ने समय पर दखल न दिया होता, तो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुई सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान को और अधिक विनाश का सामना करना पड़ता।
अप्रैल 2025 का संघर्ष और भारतीय वर्चस्व
ऑपरेशन सिंदूर की नींव पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में रखी गई थी, जिसे भारत ने 7 मई 2025 को शुरू किया था। चार दिनों तक चले इस भीषण सैन्य टकराव में लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और आधुनिक ड्रोन्स का व्यापक उपयोग हुआ था। भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर न केवल आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, बल्कि 11 पाकिस्तानी एयर बेस को निशाना बनाकर अपनी हवाई श्रेष्ठता भी साबित कर दी थी। नौरीन के ये दावे पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती और बहस का विषय बन गए हैं।












