Iran War
Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ रणनीति से ज्यादा संसाधनों और धन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) को ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। इस कमी को पूरा करने के लिए पेंटागन ने अमेरिकी कांग्रेस से 200 अरब डॉलर की अतिरिक्त धनराशि की मांग की है। गौरतलब है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी भी नए सैन्य खर्च या फंडिंग को मंजूरी देने का अंतिम और एकमात्र अधिकार कांग्रेस के पास सुरक्षित है।
यह धनराशि इतनी विशाल है कि इसे लेकर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ‘तस्नीम’ और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर खुलासा किया है कि पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर अपना अनुरोध व्हाइट हाउस को भेज दिया है। इतनी बड़ी रकम पर कांग्रेस में तीखी बहस होना तय माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिकी करदाताओं के पैसे और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मामला है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से जब इस भारी-भरकम राशि के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही सीधा और सख्त लहजा अपनाया। हालांकि उन्होंने 200 अरब डॉलर के सटीक आंकड़े की पुष्टि नहीं की और कहा कि यह संख्या बदल सकती है, लेकिन उन्होंने फंडिंग की जरूरत को जायज ठहराया। हेगसेथ ने कहा, “बुरे लोगों को खत्म करने के लिए निवेश की आवश्यकता होती है। हम कांग्रेस के पास यह सुनिश्चित करने जा रहे हैं कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन हों।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत रहा है और यह अभियान अपनी तय समय सीमा से आगे चल रहा है।
कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के विश्लेषण के अनुसार, यदि इस 200 अरब डॉलर की मांग को मंजूरी मिल जाती है, तो यह साल 2020 के कोविड-19 राहत पैकेज के बाद अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा एकल खर्च बिल होगा। यह दर्शाता है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष कितना व्यापक और खर्चीला होता जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे यह मामला फिलहाल व्हाइट हाउस में अटका हुआ है।
यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती पेश करती है। ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल और चुनाव अभियानों के दौरान लगातार इराक और अफगानिस्तान जैसे ‘अनंत युद्धों’ (Forever Wars) की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा तर्क दिया है कि अमेरिका को दूसरे देशों की लड़ाइयों में अपने अरबों डॉलर बर्बाद नहीं करने चाहिए। अब खुद उनके प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी राशि की मांग करना उनके पुराने स्टैंड पर सवाल खड़े करता है। क्या ट्रंप एक और लंबी और महंगी जंग के लिए तैयार हैं? यह सवाल अब अमेरिकी जनता के मन में है।
भले ही वर्तमान में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों पर नियंत्रण है, लेकिन फंडिंग हासिल करना फिर भी आसान नहीं होगा। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर कई रूढ़िवादी सांसद ‘फिस्कल कंजर्वेटिव’ हैं, जो सरकारी खर्च में भारी कटौती के पक्षधर हैं और वे इतने बड़े सैन्य बजट को आसानी से हरी झंडी नहीं देंगे। दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य भी इस मांग का कड़ा विरोध कर सकते हैं। ऐसे में 200 अरब डॉलर का यह प्रस्ताव ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो…
Ambikapur Cyber Crime: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की पुलिस ने तकनीकी अपराधों के खिलाफ एक…
Delhi Riots Case: दिल्ली दंगों की कथित साजिश के मामले में लंबे समय से जेल…
Surguja Plastic Roads: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले ने कचरा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास…
TMC Manifesto 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने…
Janjgir ACB Action: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB)…
This website uses cookies.