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Breaking News : दिल्ली और पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आधिकारिक तौर पर ‘आप’ से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है। यह केवल एक व्यक्तिगत इस्तीफा नहीं है, बल्कि एक व्यापक दलबदल है। राघव चड्ढा के नेतृत्व में राज्यसभा के दो-तिहाई सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो रहे हैं। इस कदम ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है, क्योंकि ‘आप’ के संसदीय दल का एक बड़ा हिस्सा अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यशैली में विश्वास जताते हुए भाजपा के पाले में खड़ा हो गया है।
इस्तीफे की घोषणा करते हुए राघव चड्ढा भावुक और हमलावर दोनों नजर आए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के महत्वपूर्ण 15 साल समर्पित कर दिए, वह आज अपने मूल उद्देश्यों से पूरी तरह भटक चुकी है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि वर्तमान में आम आदमी पार्टी “भ्रष्ट और कंपरमाइज्ड” लोगों के नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि उनके पास दो ही विकल्प थे—या तो वे राजनीति छोड़ दें या फिर देश हित में एक नया रास्ता चुनें। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे राजनीति में करियर बनाने नहीं, बल्कि करियर छोड़कर देश बदलने आए थे, लेकिन अब ‘आप’ में रहकर जनसेवा संभव नहीं रह गई है।
राघव चड्ढा के अनुसार, उन्होंने राज्यसभा सभापति को सांसदों के हस्ताक्षर सौंप दिए हैं, जो दलबदल कानून के तहत ‘विलय’ की शर्त को पूरा करते हैं। आम आदमी पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने पाला बदल लिया है। भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत सिंह साहनी और एन.डी. गुप्ता (राजेंद्र गुप्ता) शामिल हैं। यह आंकड़ा दो-तिहाई बहुमत को दर्शाता है, जिससे इन सांसदों की सदस्यता पर भी खतरा नहीं मंडराएगा। अब राज्यसभा में संजय सिंह, बलबीर सिंह सीचेवाल और संजीव अरोड़ा ही ‘आप’ के खेमे में शेष बचे नजर आ रहे हैं।
पार्टी के रणनीतिकार और पूर्व संगठन महासचिव डॉ. संदीप पाठक ने भी इस मौके पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक किसान का बेटा होने के नाते और आईआईटी में प्रोफेसर के पद को छोड़कर वे केवल इसलिए राजनीति में आए थे ताकि देश के लिए कुछ सार्थक कर सकें। पाठक ने कहा, “मैंने 10 साल तक पूरी ईमानदारी से अरविंद केजरीवाल का साथ दिया, लेकिन आज पार्टी की जो स्थिति है, उसे देखकर मन व्यथित है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि देश सेवा का उनका संकल्प अडिग है, लेकिन अब उनके रास्ते आम आदमी पार्टी से हमेशा के लिए अलग हो चुके हैं।
विद्रोही सांसदों ने एक सुर में कहा कि अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी लीडरशिप और गृह मंत्री अमित शाह के कड़े संकल्पों के साथ बिना रुके देश के विकास में योगदान देंगे। राघव चड्ढा ने दावा किया कि आम जनता का भरोसा अब आम आदमी पार्टी से उठ चुका है और लोग विकल्प की तलाश में हैं। इस बड़े दलबदल के बाद अब दिल्ली और पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने तय हैं। विपक्षी खेमे में इस हलचल ने यह संकेत दे दिया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी ‘आप’ के भीतर असंतोष की आग काफी समय से सुलग रही थी, जो अब एक बड़े विस्फोट के रूप में सामने आई है।
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