Rajya Sabha Clash: संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर राज्यसभा में मंगलवार को तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इस विषय पर केंद्र सरकार को घेरते हुए चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना था कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कार्यवाही के दौरान माहौल इतना गर्म हो गया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित होती रही।

खरगे और किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कथित राम मंदिर दान मामले का उल्लेख करते हुए पूछा कि इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की क्या भूमिका है। इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हो गई। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए और कुछ समय तक शोर-शराबा जारी रहा। इस दौरान सभापति को व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप भी करना पड़ा।

संसद के बाहर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
संसद के बाहर भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े दान, भूमि खरीद, बहुमूल्य उपहारों और प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। खरगे ने यह भी कहा कि ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इससे जुड़े कई प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहे हैं। ऐसे में सरकार को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं तो प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। खरगे ने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताते हुए खारिज किया।
प्रधानमंत्री की संसद में मौजूदगी को लेकर भी विपक्ष का हमला
राम मंदिर दान विवाद के साथ-साथ विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसद में अनुपस्थिति का मुद्दा भी उठाया। मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद बहस और जवाबदेही का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को छात्रों से जुड़े मुद्दों, पेपर लीक प्रकरण और अन्य सार्वजनिक विषयों पर भी सदन में विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को संसद के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए।

संसदीय गतिरोध के बीच राजनीतिक माहौल गर्म
संसद के मौजूदा सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। राम मंदिर दान विवाद भी अब इसी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है। विपक्ष सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब और जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार विपक्ष के आरोपों को निराधार और राजनीतिक प्रेरित बता रही है। राज्यसभा में हुए हंगामे के बाद यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में भी यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के सामने अपनी बात रख रहे हैं, जबकि इस विषय पर आगे की संसदीय कार्यवाही और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
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