Monsoon Health : मानसून के मौसम में बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन इन लक्षणों के सामने आते ही यह सवाल उठने लगता है कि कहीं यह डेंगू, चिकनगुनिया या H1N1 यानी स्वाइन फ्लू तो नहीं है। परेशानी इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इन संक्रमणों के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई दे सकते हैं। तेज बुखार, थकान, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और जी मिचलाना कई वायरल संक्रमणों में हो सकता है। ऐसे में केवल लक्षण देखकर बीमारी की सही पहचान करना मुश्किल है।
डेंगू, चिकनगुनिया और H1N1 कैसे फैलते हैं
डेंगू और चिकनगुनिया मुख्य रूप से संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारियां हैं। वहीं H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक या सांस से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आने से फैल सकता है। सामान्य वायरल फीवर कई अलग-अलग वायरस के कारण हो सकता है। इसलिए बुखार आने पर बीमारी को खुद से तय करने के बजाय मरीज की स्थिति और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
चारों बीमारियों के लक्षणों में क्या अंतर है
डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में तेज दर्द, मतली, उल्टी और त्वचा पर दाने दिखाई दे सकते हैं। चिकनगुनिया में अचानक बुखार के साथ जोड़ों का दर्द और सूजन अधिक प्रमुख हो सकती है। H1N1 में बुखार के साथ खांसी, गले में दर्द, नाक बहना या बंद होना, ठंड लगना और बदन दर्द जैसे श्वसन संबंधी लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं। सामान्य वायरल फीवर में बुखार, थकान, सिरदर्द, गले में परेशानी और नाक बहना हो सकता है। हालांकि, इन संकेतों से बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
H1N1 में अचानक शुरू हो सकते हैं लक्षण
सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन एवं इंटेंसिविस्ट डॉ. संजय महाजन के अनुसार, H1N1 को आम तौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है। इसके लक्षण कई बार अचानक शुरू होते हैं। मरीज को तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में दर्द, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। कुछ मरीजों, विशेषकर बच्चों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है। यदि बुखार के साथ खांसी और सांस से जुड़ी परेशानी प्रमुख हो, तो डॉक्टर इन्फ्लुएंजा की संभावना पर विचार कर सकते हैं।
H1N1 में किन लोगों को ज्यादा सावधानी चाहिए
अधिकांश लोग फ्लू जैसे संक्रमण से कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में निमोनिया और गंभीर सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा अस्थमा, डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों में बुखार और सांस संबंधी लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
चिकनगुनिया में जोड़ों का दर्द बनता है खास संकेत
चिकनगुनिया की पहचान में तेज जोड़ों का दर्द महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। बुखार के साथ कलाई, उंगलियों, टखनों और घुटनों में दर्द या सूजन हो सकती है। कई मरीजों को चलने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी तक होने लगती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कुछ लोगों में जोड़ों का दर्द जल्दी कम हो जाता है, जबकि कुछ मरीजों में यह समस्या कई सप्ताह या महीनों तक बनी रह सकती है। बुजुर्गों, नवजात बच्चों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
डेंगू में बुखार उतरने के बाद भी रहें सतर्क
डेंगू में तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और शरीर में दर्द, मतली, उल्टी तथा त्वचा पर दाने हो सकते हैं। कई मरीज सामान्य रूप से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। डेंगू में गंभीर चेतावनी संकेत कई बार बुखार कम होने के आसपास या उसके बाद सामने आ सकते हैं। इसलिए इस अवधि में मरीज की निगरानी जरूरी है।
मानसून में बुखार होने पर हर टेस्ट जरूरी नहीं
हर बुखार होने पर अपनी तरफ से डेंगू, चिकनगुनिया और H1N1 की सभी जांच करा लेना जरूरी नहीं है। दूसरी ओर, लगातार तेज बुखार को सामान्य वायरल समझकर कई दिनों तक टालना भी सही नहीं है। डॉक्टर बीमारी की अवधि, लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर जांच तय कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर CBC, प्लेटलेट, हीमैटोक्रिट, डेंगू संबंधी जांच, चिकनगुनिया टेस्ट या H1N1 की जांच कराई जा सकती है। मलेरिया और अन्य संक्रमणों की जांच भी परिस्थितियों के अनुसार जरूरी हो सकती है।
जांच का सही समय भी महत्वपूर्ण है
संक्रमण की शुरुआत में कराई गई कुछ जांचों का परिणाम स्पष्ट नहीं आ सकता। इसलिए टेस्ट कब कराया जाए, यह बीमारी के कितने दिन हो चुके हैं और मरीज की स्थिति कैसी है, इस पर निर्भर करता है। रिपोर्ट आने के बाद भी खुद से दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। केवल एक रिपोर्ट के आधार पर बीमारी की गंभीरता का आकलन करना भी उचित नहीं है। मरीज के लक्षण, जांच और चिकित्सकीय स्थिति को साथ देखकर उपचार तय किया जाता है।
ये संकेत दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं
तेज बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, ऑक्सीजन कम होना, लगातार उल्टी, तेज पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, भ्रम या बेहोशी जैसे लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में रक्त दिखाई देना, पेशाब बहुत कम होना अथवा होंठ-चेहरा नीला पड़ना भी तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत बताता है। बुखार या खांसी ठीक होने के बाद अचानक दोबारा बढ़ना भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डेंगू में बुखार कम होने के बाद खतरा टलता नहीं
डेंगू के संदिग्ध मरीज में बुखार कम होने के बाद भी पेट में तेज दर्द, बार-बार उल्टी, तेजी से सांस चलना, रक्तस्राव और अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ये गंभीर डेंगू की चेतावनी हो सकते हैं। इसलिए मरीज को केवल तापमान सामान्य होने के आधार पर पूरी तरह स्वस्थ नहीं मानना चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निगरानी और जरूरी जांच जारी रखना महत्वपूर्ण है।
डेंगू के संदेह में इन दवाओं से बचें
यदि डेंगू की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में इनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है। बुखार की दवा भी मरीज की उम्र, दूसरी बीमारियों और चल रही दवाओं को ध्यान में रखकर लेनी चाहिए। H1N1 में एंटीवायरल दवा की आवश्यकता है या नहीं, इसका फैसला डॉक्टर करते हैं। वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक सामान्य उपचार नहीं है, इसलिए पुरानी पर्ची या किसी अन्य व्यक्ति की दवा इस्तेमाल करने से बचें।
घर पर मरीज की देखभाल में रखें इन बातों का ध्यान
डॉक्टर द्वारा घर पर उपचार की सलाह मिलने पर मरीज को पर्याप्त तरल दिया जाना चाहिए, बशर्ते किसी बीमारी के कारण डॉक्टर ने पानी सीमित करने को न कहा हो। तापमान और बुखार का समय नोट करते रहें। पेशाब की मात्रा, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी और मरीज की सतर्कता पर नजर रखें। H1N1 जैसे श्वसन संक्रमण के लक्षण हों तो मास्क, हाथों की सफाई और जरूरत के अनुसार दूरी बनाए रखना उपयोगी है। डेंगू या चिकनगुनिया की आशंका में मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल भी करें।
मानसून के हर बुखार को सामान्य न समझें
मानसून में होने वाला हर बुखार डेंगू, चिकनगुनिया या H1N1 नहीं होता। फिर भी लगातार तेज बुखार, असामान्य कमजोरी, सांस की परेशानी, रक्तस्राव या अचानक बिगड़ती हालत को सामान्य वायरल फीवर मानकर नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। सही समय पर चिकित्सकीय जांच, पर्याप्त तरल, आराम और मरीज की निगरानी गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में लक्षणों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी तरह के लक्षण होने पर स्वयं बीमारी का निदान या दवा शुरू न करें। उचित जांच और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।
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