Ram Mandir Scam : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब एक बड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई में बदल गया है। इस संवेदनशील प्रकरण में SIT (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप मंदिर परिसर में वर्षों से जमे अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। हाल ही में राम मंदिर के रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव को उनके पद से हटाकर गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया है। अर्जुन देव वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात थे और उनके पास मंदिर के 1,600 से अधिक CCTV कैमरों और वायरलेस संचार व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से करीबी के चलते वे पिछले 17 वर्षों से अपने स्थानांतरण को रुकवाने में सफल रहते थे।

जांच के दायरे में 80 संदिग्ध, नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू
पुलिस की जांच का दायरा अब मात्र आठ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में लगभग 70 से 80 लोग पुलिस और SIT की कड़ी निगरानी के दायरे में हैं। इन सभी को औपचारिक नोटिस भेजे जा रहे हैं ताकि उनसे विस्तृत पूछताछ की जा सके। SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि RMO अर्जुन देव का प्रभाव उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों से कहीं अधिक था और वे VVIP दर्शन की व्यवस्था समेत मंदिर प्रबंधन के कई अन्य गोपनीय कार्यों में भी अत्यधिक सक्रिय थे। यह व्यापक जांच दर्शाती है कि इस चोरी की घटना में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रभावशाली लोग भी संलिप्त हो सकते हैं।

बैंकों की भूमिका संदिग्ध, SBI समेत 6 बैंकों को नोटिस
चढ़ावा चोरी के इस जाल की कड़ियां अब बैंकों तक जा पहुंची हैं, जहाँ राम मंदिर ट्रस्ट का धन जमा किया जाता था। जांच एजेंसियों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक समेत कुल छह बैंकों को नोटिस जारी किए हैं। पुलिस ने विशेष रूप से SBI से उन बैंक कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिन्हें दान की गिनती और उसे जमा करने की प्रक्रिया के लिए तैनात किया गया था। जांच का मुख्य केंद्र बैंक के दो कर्मचारी—रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप—हैं, जिन पर कैश काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान मिलीभगत का संदेह जताया जा रहा है। साथ ही, अयोध्या के अन्य बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों और संदिग्धों के व्यक्तिगत बैंक खातों का पूरा ब्योरा पुलिस को उपलब्ध कराएं।
डिजिटल सबूतों के लिए आरोपियों के फोन भेजे गए फोरेंसिक लैब
गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों से जुड़े सबूतों को पुख्ता करने के लिए पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों का सहारा ले रही है। शक है कि आरोपियों ने अपने फोन से कई महत्वपूर्ण ‘व्हाट्सएप चैट’ और कॉल लॉग्स डिलीट कर दिए हैं ताकि उनकी सांठ-गांठ का पता न चल सके। अब इन मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा जा रहा है ताकि डिलीट किए गए डेटा को रिकवर किया जा सके। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एंटी-करप्शन कोर्ट में पेश करने के बाद, अदालत ने सभी आठों आरोपियों को 14 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अभी रिमांड की मांग नहीं कर रही है, क्योंकि बरामद दस्तावेजों और नकदी का सत्यापन प्राथमिकता पर है।
आरोपियों की बेहिसाब संपत्ति और लग्जरी जीवनशैली का खुलासा
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के घरों से संपत्ति के दस्तावेज, जमीन की रजिस्ट्री और बैंक पासबुक मिली हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा लवकुश मिश्रा की संपत्ति को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि 20,000 रुपये मासिक आय वाला यह व्यक्ति अयोध्या के शहादतगंज में करीब 1,000 वर्गफीट जमीन पर तीन मंजिला आलीशान मकान बनवा रहा था। इस संपत्ति में जमीन की कीमत और निर्माण लागत मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का निवेश पाया गया है। पड़ोसियों ने बताया कि पुलिस जांच शुरू होने से ठीक पहले तक यहाँ निर्माण कार्य जोरों पर था, जिसे अब रोक दिया गया है। इसके अलावा मनीष कुमार यादव के घर से 36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक है।
आठ आरोपियों की कार्यप्रणाली: दानपात्र से तिजोरी तक की हेराफेरी
FIR के अनुसार, आठों आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से दान की राशि में हेराफेरी की। रामशंकर यादव (टिन्नू) और करुणेश पांडेय जैसे लोग दानपात्रों की निगरानी और उन्हें बेसमेंट तक पहुँचाने के काम में तैनात थे, जहाँ से पैसा रास्ते में ही निकाल लिया जाता था। वहीं लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और मनीष यादव सीधे कैश काउंटिंग टीम में रहकर गबन को अंजाम देते थे। सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, जो काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे, पर निगरानी में जानबूझकर लापरवाही बरतने और अनियमितताओं को बढ़ावा देने का आरोप है। अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्रा भी इसी कड़ी का हिस्सा थे। पुलिस अब इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश और विश्वासघात की धाराओं के तहत पुख्ता सबूत जुटा रही है।
व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की तैयारी
राम मंदिर ट्रस्ट अब इस शर्मनाक घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनाने की कवायद में है। ट्रस्ट का प्रस्ताव है कि भविष्य में श्रद्धालुओं के लिए QR कोड के जरिए दान की सुविधा अनिवार्य की जाए ताकि नकदी का लेनदेन कम हो सके। साथ ही, परिसर में फैले 20 दानपात्रों को हटाकर केवल एक ही मुख्य दानपात्र रखा जाएगा, जिसकी निगरानी AI-आधारित कैमरों से होगी। सोना-चांदी के चढ़ावे को सीधे सरकारी टकसाल भेजने का भी निर्णय लिया गया है। 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में इन बदलावों पर मुहर लग सकती है, जिसका उद्देश्य मंदिर की पवित्रता को बरकरार रखना और धन के दुरुपयोग को भविष्य के लिए रोकना है।










