राम मंदिर से जुड़े आभूषण चोरी मामले में टीनू यादव के केस की जांच को एक अहम गवाही ने नया मोड़ दे दिया है। गवाह ने बयान में कहा कि ‘चांदी गला दी गई है, उसे भूल जाओ’। इस बयान ने पूरे मामले में सनसनी फैला दी है और पुलिस जांच तेज हो गई है।
राम मंदिर से जुड़े आभूषण चोरी मामले में टीनू यादव के केस की जांच को एक अहम गवाही ने नया मोड़ दे दिया है। गवाह ने बयान में कहा कि ‘चांदी गला दी गई है, उसे भूल जाओ’। इस बयान ने पूरे मामले में सनसनी फैला दी है और पुलिस जांच तेज हो गई है।

Ram Mandir : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान के आभूषणों के कथित गबन मामले ने पूरे देश की आस्था को झकझोर कर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से 15 दिनों तक धैर्य रखने की अपील की है। वर्तमान में, इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए एसआईटी (SIT) की टीम पिछले छह दिनों से लगातार सक्रिय है। तीन सदस्यीय यह एसआईटी अब मंदिर के शीर्ष पदाधिकारियों से भी गहन पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच का दायरा अब उन लोगों तक फैल रहा है जिन पर दानपात्र की देखरेख और चढ़ावे के प्रबंधन की सीधी जिम्मेदारी थी।

इस प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी सहयोगी रहे राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का नाम मुख्य रूप से सामने आ रहा है। उन पर दानपात्र से करोड़ों रुपये और कीमती आभूषणों के गबन का गंभीर आरोप है। रिपोर्ट्स के अनुसार, टिन्नू यादव ने दान करने वाले एक व्यक्ति से यह तक कह दिया था कि चांदी के आभूषण गला दिए गए हैं, इसलिए उन्हें भूल जाएं। फिलहाल, एसआईटी टिन्नू यादव की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा रही है और माना जा रहा है कि बहुत जल्द उसकी गिरफ्तारी संभव है। वहीं, मामले में लवकुश मिश्रा पहले से ही एसआईटी की हिरासत में है, जिससे पूछताछ जारी है।

घोटाले की पुष्टि जौनपुर के एक कारोबारी अजय विश्वकर्मा की शिकायत से हुई। उन्होंने रामलला को चांदी की चरण पादुकाएं और रत्नों से जड़ा एक हार अर्पित किया था। हैरान करने वाली बात यह है कि न तो उन्हें इसके बदले कोई रसीद दी गई और न ही अब वे कीमती उपहार मंदिर में मौजूद हैं। एसआईटी ने जब इस बाबत मंदिर प्रशासन से जानकारी मांगी, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि मंदिर परिसर में बिना किसी आधिकारिक रसीद और एसओपी (SOP) के चढ़ावा स्वीकार किया जा रहा था, जिससे चोरी की आशंका और भी प्रबल हो गई है।
एसआईटी ने राम मंदिर के प्रबंधन में जुड़े अनिल मिश्रा से तीन घंटे तक मैराथन पूछताछ की। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (SOP) का पालन नहीं किया जा रहा था। मंदिर के कर्मचारियों के पास कोई लिखित या आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि सारा काम महज मौखिक आदेशों पर चल रहा था। यह प्रशासनिक अराजकता ही घोटाले का सबसे बड़ा कारण बनी। प्रबंधन की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर दानपात्र और चढ़ावे में बड़े स्तर पर धांधली को अंजाम दिया गया।
इस विवाद में अब एक नया मोड़ तब आया जब मंदिर निर्माण से जुड़े रहे पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। वर्मा का दावा है कि चढ़ावा चोरी तो केवल एक हिस्सा है, असली खेल तो मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही जारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनिल मिश्रा को वित्तीय मामलों की कमान सौंपी गई थी और उन्होंने हर निर्माण कार्य में 40 प्रतिशत कमीशन लेना शुरू कर दिया था। पूर्व इंजीनियर के इस सनसनीखेज दावे ने राम मंदिर निर्माण की शुचिता पर भी सवाल उठा दिए हैं। अब एसआईटी इन आरोपों की भी जांच कर रही है, जिससे जांच का दायरा और अधिक विस्तृत हो गया है।


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