RBI Announcement : आम लोगों को अगस्त की आरबीआई मौद्रिक नीति से सस्ते कर्ज की जो उम्मीद थी, वह फिलहाल पूरी नहीं हो सकी। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 अगस्त को रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया। रेपो रेट 5.50% पर स्थिर रखा गया है। यानी फिलहाल आपकी होम, ऑटो और पर्सनल लोन की EMI में कोई राहत नहीं मिलेगी।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई दर अब भी नियंत्रण में है और ब्याज दरों में पहले ही 1% की कटौती की जा चुकी है। जून की पॉलिसी में रेपो रेट में 0.50% की कटौती की गई थी, जो इस साल की तीसरी कटौती थी। हालांकि अगस्त की बैठक में पॉलिसी स्टांस ‘न्यूट्रल’ रखा गया है, जिससे आने वाले महीनों में रेट कट की संभावना बनी हुई है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का अनुमान घटाकर 3.1% कर दिया है, जो पहले 3.7% था। दूसरी तिमाही में महंगाई 2.1%, तीसरी में 3.1% और चौथी तिमाही में यह 4.4% तक पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में महंगाई 4.9% रहने का अनुमान है। गवर्नर ने सोने की कीमतों में तेजी को कोर इन्फ्लेशन (मूल मुद्रास्फीति) बढ़ने की वजह बताया, जो अब 4.4% पर है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए देश की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5% पर बरकरार रखा है। पहली तिमाही में यह 6.5%, दूसरी में 6.7%, तीसरी में 6.6% और चौथी तिमाही में 6.3% रहने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी का अप्रत्यक्ष असर भी पॉलिसी के फैसले पर पड़ा है। हालिया वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव को देखते हुए आरबीआई ने सतर्क रुख अपनाया है।
ग्रांट थॉर्नटन के पार्टनर विवेक अय्यर के मुताबिक, “वैश्विक अस्थिरता और पहले की दर कटौती का असर पूरी तरह दिखने में वक्त लगेगा। इसलिए रेपो रेट में बदलाव न होना स्वाभाविक है।”
REA इंडिया के सीईओ प्रवीण शर्मा ने कहा, “घर खरीदार अब अल्पकालिक ब्याज दरों से ज्यादा दीर्घकालिक स्थिरता और आत्मविश्वास से प्रेरित हैं। रियल एस्टेट बाजार में मांग बनी हुई है।”
मौद्रिक नीति समिति में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता और कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन शामिल हैं। बाहरी सदस्यों में नागेश कुमार, सौरभ भट्टाचार्य और राम सिंह शामिल हैं।
सरकार ने आरबीआई को खुदरा महंगाई को 4% (±2%) के दायरे में बनाए रखने का लक्ष्य दिया है, जिसे आरबीआई अभी तक काफी हद तक हासिल कर रहा है।
इस बार की आरबीआई नीति में EMI में राहत तो नहीं मिली, लेकिन स्थिर रेपो रेट और न्यूट्रल रुख संकेत देता है कि यदि हालात अनुकूल रहे, तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में फिर से कटौती संभव है। महंगाई पर नियंत्रण और स्थिर विकास दर आरबीआई की प्राथमिकता बनी हुई है।
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